महाराष्ट्र सरकार ने मुंबई की बृहन्मुंबई महानगरपालिका के पूर्व कमिश्नर इकबाल सिंह चहल को गृह विभाग का मुख्य सचिव नियुक्त किया है. इसे लेकर अब विपक्ष सरकार पर हल्ला बोल रहा है.
शिवसेना (UBT) के नेता और प्रवक्ता आनंद दुबे ने सरकार के इस फैसले पर कहा,'हिंदी में कहावत है जब सैंया भये कोतवाल तब डर काहेका. अगर सरकार में बैठे लोग आपके शुभचिंतक हो जाएं और आप अधिकारी हैं तो आपकी तो मौज ही मौज है. आज का ही उदाहरण देख लीजिए पूर्व बीएमसी कमिश्नर चहल को एसीएस होम नियुक्त किया गया है.'
नए सिरे से जांच की मांग
शिवसेना (UBT) प्रवक्ता ने आगे कहा,'यह वही चहल हैं, जिनके बारे में यही सरकार कह रही थी की यह दोषी हैं. कोविड घोटाले, फर्नीचर स्कैम में ईडी का कैसे चल रहा है. ईओडब्ल्यू जांच कर रहा है और अचानक सरकार में बैठे लोग मेहरबान हो जाएं, तब एसीएस होम की लॉटरी लग जाती है. अब इसकी जांच कौन करेगा केंद्र में और राज्य में बीजेपी की सरकार है. क्या इसकी जांच नए सिरे से नहीं होनी चाहिए.
वॉशिंग पाउडर लेकर क्यों घूमते हैं?
आगे विपक्ष ने आरोप लगाया कि जिन अधिकारियों पर आप (बीजेपी) आरोप लगाते हैं, क्या उन्हें ऐसे ही दोष मुक्त करके छोड़ दिया जाएगा? तो आप आरोप क्यूं लगाते हैं. ऐसे ही अजीत पवार पर 70,000 करोड़ के घोटाले का आरोप लगाया था और फिर उनके साथ सरकार में आ गए. ऐसा क्यों करते हैं. पूरी जांच क्यूं नहीं करते. वॉशिंग पाउडर लेकर क्यों घूमते हैं. जनता जनार्दन सब देख रही है. आने वाले चुनाव में वह इसका जवाब देगी.'
ईडी-EOW कर रही है एक मामले की जांच
बता दें कि इकबाल सिंह चहल वहीं अधिकारी हैं, जो कोविड के समय बृहन्मुंबई महानगरपालिका के बीएमसी कमिश्नर थे. तब बीजेपी ने चहल पर काफी गंभीर आरोप लगाए थे. इतना ही नहीं कोविड स्कैम मामलों की जांच ईओडब्लू और ईडी द्वारा की जा रही है. ईओडब्ल्यू में कोविड स्केम को लेकर कुल 7 मामले दर्ज हैं, जिसमें महा विकास अघाड़ी के कई नेताओं से भी पूछताछ की जा चुकी है.
दीपेश त्रिपाठी