महाराष्ट्र विधानसभा चुनावः बीजेपी में शामिल होने के लिए लगी नेताओं की लाइन

महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव नजदीक आने पर कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के कई नेता अब तक भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) में शामिल हो चुके हैं. अमित शाह भी कह चुके हैं कि अगर बीजेपी दरवाजे खोल दे तो कांग्रेस और NCP में पृथ्वीराज चव्हाण और शरद पवार को छोड़कर सभी नेता शामिल हो जाएंगे.

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महाराष्ट्र के सोलापुर में रैली के दौरान सीएम फडणवीस के साथ बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह. (फोटो-ट्विटर) महाराष्ट्र के सोलापुर में रैली के दौरान सीएम फडणवीस के साथ बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह. (फोटो-ट्विटर)

नवनीत मिश्रा

  • नई दिल्ली,
  • 06 सितंबर 2019,
  • अपडेटेड 1:15 PM IST

  • महाराष्ट्र में अक्टूबर में संभावित हैं विधानसभा चुनाव
  • बीजेपी में शामिल हो रहे कांग्रेस और एनसीपी के नेता

  • शरद पवार के रिश्तेदार जगजीत भी बीजेपी से जुड़े

भारतीय जनता पार्टी(बीजेपी) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने महाराष्ट्र के सोलापुर में एक सितंबर को रैली के दौरान कहा,"अगर बीजेपी अपने दरवाजे खोल दे तो पृथ्वीराज चव्हाण और शरद पवार को छोड़कर कांग्रेस और एनसीपी के सभी नेता बीजेपी में शामिल हो जाएंगे." शरद पवार जहां राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी(एनसीपी) के मुखिया हैं वहीं पृथ्वीराज चव्हाण पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हैं .

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दरअसल, अमित शाह ने कांग्रेस और एनसीपी को लेकर यह बयान यूं ही नहीं दिया. हाल में जिस तरह से कांग्रेस और एनसीपी के नेताओं में भगदड़ मची है, पार्टी छोड़ने वाला हर नेता बीजेपी के दरवाजे पर दस्तक दे रहा है, उसी के मद्देनजर अमित शाह ने यह बयान देकर राज्य में बीजेपी की मजबूती का संदेश दिया है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनाव पूर्व अगर विरोधी दलों के नेता किसी दल में ज्यादा संख्या में जाते हैं तो इससे उस पार्टी को मनोबल जहां ऊंचा होता है, वहीं जनता को भी लगता है कि अमुक पार्टी के पक्ष में हवा ज्यादा बह रही है.

विधानसभा चुनाव नजदीक आने पर विरोधी दलों के कई नेता भाजपाई बन चुके हैं तो और कई नेता अभी संपर्क में बताए जाते हैं. कांग्रेस नेता और पूर्व मंत्री हर्षवर्धन पाटिल ने भी हाल ही में अपने बयानों से बीजेपी में जाने के संकेत दिए हैं.

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पुणे की इंदापुर सीट से चार बार के विधायक हर्षवर्धन पाटिल ने हाल ही में विधानसभा क्षेत्र की एक मीटिंग में पार्टी समर्थकों से पूछा कि उन्हें क्या करना चाहिए तो लोगों ने कहा बीजेपी में जाना चाहिए. सूत्र बता रहे हैं कि पाटिल बीजेपी नेताओं के संपर्क में हैं. पुणे की इंदापुर सीट से हर्षवर्धन चार बार के विधायक रहे हैं. पाटिल वर्ष 1995 से राज्य की सरकारों में मंत्री रहे. पाटिल 1995, 1999 और 2004 में  इंदापुर सीट से निर्दलीय चुनाव जीतते रहे. वहीं 2009 में कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीते.  1995 में उन्होंने शिवसेना-बीजेपी गठबंधन को समर्थन देकर मंत्री पद हासिल किया था.

एनसीपी को लगे कई झटके

महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव नजदीक आने पर एनसीपी को कई झटके लग चुके हैं. एनसीपी के वरिष्ठ नेताओं में शुमार रहे धनंजय महादिक और चित्रा वाघ अब बीजेपी में हैं. खास बात है कि बीजेपी ने एनसीपी के इन दोनों पूर्व नेताओं को महाराष्ट्र संगठन में उपाध्यक्ष बनाकर पार्टी बदलने का इनाम भी दे दिया है. महाराष्ट्र बीजेपी के अध्यक्ष चंद्रकांत पाटिल ने दोनों नेताओ की नियुक्ति की है. चित्रा एनसीपी की महिला विंग की अध्यक्ष थीं. एनसीपी के वैभव पिचाड (अकोले) और शिवेंद्र राजे भोसले (सातारा) भी विधायक पद से इस्तीफा देकर बीजेपी की सदस्यता ग्रहण किए हैं.

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खास बात रही कि शरद पवार के रिश्तेदार और पार्टी के वरिष्ठ नेता पदम सिंह पाटिल के बेटे पूर्व मंत्री राणा जगजीत सिंह पाटिल भी अब बीजेपी नेता बन गए हैं. पद्म सिंह की बहन की शादी शरद पवार के भतीजे और पर्व  डिप्टी चीफ मिनिस्टर अजीत पवार से शादी हुई है. एनसीपी के टिकट पर उस्मानाबाद लोकसभा सीट हारने के बाद दलबदल करने पर राणा जगजीत सिंह ने कहा कि वह जिले की समस्याओं को सुलझाने के लिए बीजेपी में जुड़े हैं.

कांग्रेस नेता भी बने भाजपाई

एनसीपी ही नहीं कांग्रेस में भी बीजेपी ने सेंधमारी की है. महाराष्ट्र में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और विधानसभा में नेता विपक्ष रहे राधाकृष्ण विखे पाटिल अपने बेटे सुजय के साथ पहले ही बीजेपी की सदस्यता ले चुके हैं. वडाला (मुंबई) से कांग्रेस के विधायक कालिदास कोलंबकर भाजपाई बन चुके हैं. कांग्रेस के विधायक जयकुमार गोरे ने बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह की सोलापुर रैली के दौरान भाजपा की सदस्यता ग्रहण की थी. महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता नारायण राणे भी बीजेपी में शामिल होने की लाइन में हैं.

हालांकि शिवसेना के विरोध के कारण बीजेपी अभी उन्हें शामिल करने का फैसला नहीं कर पा रही है. हालांकि कांग्रेस से अलग होने पर नारायण राणे बीजेपी के समर्थन से राज्यसभा जाने में सफल रहे. उनकी पार्टी महाराष्ट्र स्वाभिमान पक्ष फिलहाल एनडीए का हिस्सा है.

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