महाराष्ट्र की लातूर महानगर पालिका में कर्मचारियों की काहिली से एक डिप्टी मेयर इतना परेशान हो गया कि उसने अपने दफ्तर पर ताला जड़ दिया. इस मेयर ने कहा कि पूरे दफ्तर में आलसी कार्य-संस्कृति फैली हुई है. लोग इधर-उधर भटकते रहते हैं लेकिन फाइल एक टेबल से दूसरे टेबल पर नहीं जाती है. लातूर महानगर पालिका (एलएमसी) के अधिकारियों और कर्मचारियों की बेरुखी और बेतुके रवैये से परेशान होकर सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी के डिप्टी मेयर देवीदास काले ने सोमवार को अपने दफ्तर में अनोखे अंदाज में काम करने का फैसला किया.
डिप्टी मेयर देवीदास काले ने पूरे नगर प्रशासन को झटका देते हुए महत्वपूर्ण नगर नियोजन विभाग के कार्यालय को बंद कर दिया. नगर नियोजन वो दफ्तर है जहां नगर के विकास और निर्माण के लिए उसे योजनाएं बनती हैं, जमीन, फ्लैट्स की रजिस्ट्री होती है. सोमवार को सप्ताह का पहला वर्किंग डे था, बड़ी संख्या में लोग अपने काम को निपटाने के लिए दफ्तर पहुंचे थे, लेकिन वो दफ्तर में ताला लटका देख हैरान हो गए. दफ्तर में ताला लटके होने की वजह जानकर तो लोग और भी हैरान रह गए.
इधर दफ्तर बंद होने की वजह से अधिकारी भी अपनी उपस्थिति दर्ज नहीं करा पाए और इधर-उधर भटकते रहे. कुछ देर बाद डिप्टी मेयर काले के गुस्से से बचने के लिए वे अपने कार्यस्थल पर वापस लौट आए.
डिप्टी मेयर देवीदास काले ने कहा कि मौजूदा वर्क कल्चर के लिए तत्कालीन कांग्रेस शासन है. काले ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से कहा, "पिछले दो सालों से हम यहां कुछ अच्छा करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन कांग्रेस के शासन के वर्षो में पुरानी आदतें अभी तक पूरी तरह से समाप्त नहीं हुई हैं, कड़ी चेतावनी देने के लिए मुझे इस उपाय का सहारा लेना पड़ा." उन्होंने कहा कि पिछले छह महीनों से फाइलों के ढेर लगे हुए हैं. काम न होने से लोग परेशान है और लोक कल्याण के लिए कोई प्रशासनिक निर्णय नहीं लिया जा रहा है.
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