स्टड फार्म के अलावा इंजीनीयरिंग क्षेत्र में मशहूर पूनावाला इंजीनियरिंग ग्रुप के चेयरमैन-मैनेजिंग डायरेक्टर योहान पूनावाला का कहना है कि देश में कोरोना वायरस महामारी की शुरुआत में ही लॉकडाउन अनिवार्य था, लेकिन अब कंपनियां तुरंत शुरू करनी भी जरूरी हैं. उनका कहना है कि देश की अर्थव्यवस्था चरमरा गई है, ऐसे में और देर कर दी गई तो बहुत सी कंपनियां खत्म हो जाएंगी. इससे करोड़ों लोगों की नौकरियां चली जाएंगी और हिंदुस्तान ये खतरा मोल नहीं ले सकता.
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योहान पूनावाला का आरोप है कि कंपनियां शुरू करने के लिए सरकार ने बहुत ही कठोर, सख्त, क्रूर नियम बनाए हैं, जिससे कंपनियों के मालिकों का हौसला पस्त हो रहा है. उन्होंने कहा कि कंपनियां उनके मौजूदा मजदूरों को सोशल डिस्टेंसिंग के बारे में अवगत करा रही हैं, लेकिन किसी एक के संक्रमित होने पर कंपनी तीन महीने के लिए बंद करवाना, ये नियम बहुत कठोर है, कंपनी मालिक पर केस दर्ज करना भी गलत है.
इंड्रस्ट्री को सुविधाएं
पूनावाला ने बताया के भारत सरकार ने उद्योग क्षेत्र के लिए कुछ भी सकारात्मक सुविधाएं नहीं दी हैं. वहीं, यूरोपियन देश जैसे इंग्लैंड ने इंडस्ट्री को मदद करने के लिए 10% अपनी जीडीपी से निवेश उपलब्ध कराया है.अमेरिका ने भी जीडीपी का 10% इंडस्ट्री के लिए दिया है और जापान ने 20 %, जबकि भारत ने अपनी इंडस्ट्री को जीडीपी का सिर्फ एक प्रतिशत ही दिया है.
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उन्होंने कहा, जीएसटी, इनकम टैक्स, एक्साइज में कुछ सहुलियतें तुरंत मुहैया करानी चाहिए. पूनावाला ने कहा, लॉकडाउन के कारण बहुत ज्यादा नुकसान उठा चुकी कंपनियों को खड़ा करने के लिए इंग्लैंड में निजी कंपनियों के मजदूरों की तनख्वाह का 80% हिस्सा और घर के भाड़े का 80% हिस्से की जिम्मेदारी उनकी सरकार ने उठाई है, ऐसा ही भारत की सरकार को करना चाहिए.
अभी मजदूरों का जाना ठीक नहीं
पूनावाला ने कहा, लॉकडाउन के शुरुआत में ही मजदूरों को उनके गांव जाने देना जाना था. मजदूरों का जाना-आना उल्टा-पुल्टा हो गया है. टाइमिंग गलत हो रही है. अगर शुरुआत में ही मजदूर अपने गांव गए होते तो अब लॉकडाउन हटने तक वापस आना शुरू कर दिए होते. लॉकडाउन खत्म होने हैं और ऐसे में मजदूरों को उनके गांव भेज रहा जा रहा है.
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उन्होंने कहा, मजदूर नहीं होने से कई उद्योग उत्पादन शुरू नहीं कर पाएंगे. पुणे के अरबपति उद्योगपतियों में से एक योहान पूनावाला के मुताबिक, 20 से 65 की उम्र के लोगों को काम करने देना चाहिए. इस उम्र के लोग भारत की ताकत हैं, हमारी अर्थव्यवस्था दोबारा पटरी पर लाने के लिए.
कोरोना के साथ जीना
योहान पूनावाला का कहना है कि कोरोना वायरस का सामना करना होगा. उनके मुताबिक, देश में रोज एक्सीडेंट्स से 400 मौतें होती हैं, तो क्या ड्राइविंग छोड़ देंगे. डायबिटीज से देश में हर साल लाखों लोगों की जान जाती है, तो क्या चीनी खाना बंद कर देंगे. कोरोना वायरस इतनी जल्दी जाने वाला नहीं है. अब जिंदगी में बदलाव लाकर कोरोना के साथ ही जीना है. सतर्कता ही नई जिंदगी है. हर्ड इम्युनिटी डवलप करना जरूरी है. समय के साथ कोरोना वायरस का असर कम होता जाएगा, क्योंकि हमारी शरीर को उसकी आदत हो जाएगी.
पंकज खेळकर