इंदिरा गांधी के द्वारा देश में लगाए गए आपातकाल के खिलाफ सीना तानकर खड़े रहने वाले नेताओं में एक जॉर्ज फर्नांडिस भी थे, जिनका निधन पिछले साल 29 जनवरी को हो गया था. जॉर्ज फर्नांडिस ने मुंबई ट्रेड यूनियन से अपना राजनीतिक सफर शुरू किया और देश के रक्षा मंत्री तक बने. मजदूर नेता के तौर पर जॉर्ज जब अपने आपको स्थापित कर रहे थे तो बाल ठाकरे ने भी सियासत में किस्मत आजमाने के लिए शिवेसना का गठन कर लिया था.
बाल ठाकरे और जॉर्ज फर्नांडिस ऐसा नेता थे, जो शुरू से ही कांग्रेस को अपना सियासी दुश्मन मानते थे. ये दोनों नेता महाराष्ट्र के मुंबई से थे और दोनों ने मजदूर नेता के तौर पर अपनी पहचान बनाई थी. दोनों के समकालीन होने की वजह से ही जब कांग्रेस सरकार ने महाराष्ट्र हिंसा के मामले में बाल ठाकरे को गिरफ्तार कर जेल में डाल दिया था तो जॉर्ज फर्नांडिस उनसे मिलने जेल में गए थे.
बता दें कि बाल ठाकरे ने शिवसेना की बुनियाद 1966 में रखी थी. शिवसेना ने गठन के तीन साल बाद 1996 में दक्षिण भारतीयों को महाराष्ट्र से बाहर निकालने का अभियान छेड़ा था. महाराष्ट्र-कर्नाटक सीमा पर हिंसक आंदोलन छिड़ गया था, जिसके बाद महाराष्ट्र की बसंतराव नाईक सरकार ने बाल ठाकरे को हिंसा भड़काने के मामले में गिरफ्तार कर एक पुलिस लॉकअप में रखा गया था.
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बाल ठाकरे की गिरफ्तारी के बाद शिवसेना कार्यकर्ता का गुस्सा काफी भड़क गया था. ठाकरे समर्थकों ने मुंबई में तोड़फोड़-आगजनी शुरू कर दी थी और पूरा मुंबई शहर जल उठा था. इसके बाद पुलिस ने कानून व्यवस्था को बनाए रखने के लिए कड़े कदम उठाए थे, जिनमें करीब 75 शिवसेना कार्यकर्ताओं की पुलिस फायरिंग में मौत हो गई थी.
महाराष्ट्र की बिगड़ती कानून व्यवस्था और शिवसेना के हिंसक प्रदर्शन को देखते हुए जॉर्ज फर्नांडिस ने पुलिस लॉकअप में जाकर बाल ठाकरे से मुलाकात की थी. इस दौरान जॉर्ज ने बाल ठाकरे से बाहर चल रहे हिंसक आंदोलन को खत्म करने की अपील की थी. फिल्म 'बाल ठाकरे' में जॉर्ज फर्नांडिस और शिवसेना संस्थापक बाल ठाकरे की मुलाकात को दिखाया गया है.
फिल्म में जॉर्ज फर्नांडिस और बाल ठाकरे के बीच मुलाकात के दौरान संवाद इस प्रकार दिखाया गया है. बाल ठाकरे कहते हैं कि बसंतराव से हमें बहुत उम्मीदें थी, लेकिन दिल्ली के आगे वो भी झुक गए. जॉर्ज इस देश में एक हिटलर के पैदा होने की जरूरत है. इस पर जॉर्ज कहते हैं कि पैदा हो चुका है. तुम में तानाशाह की आहट दिख रही है.
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इस पर बाल ठाकरे कहते हैं कि जॉर्ज यह बात तुम बोल रहे हो, जिसे लोकतंत्र पर कभी भरोसा ही नहीं था. साथ ही ठाकरे का एक सहयोगी बोलता है कि एक समय तो आपने रेल पटरियां उखाड़ दी थीं. हमारी गिरफ्तारी पर तुम्हारे मुंह से एक लफ्ज भी नहीं निकला है उन लोगों (कांग्रेस) के खिलाफ.
जॉर्ज कहते हैं कि ऐसा क्यों बोल रहे हो, तुमसे मिलने आया हूं. वो कहते हैं कि बाहर सरकार का कहना है कि शिवसेना को वैचारिक मुकबाला करना चाहिए न कि हिंसा करना चाहिए. बाल ठाकरे कहते हैं कि वैचारिक मुकाबला कैसे करें जेल में बंद होकर. बैंगलोर में मद्रास मेल ट्रेन को जलाने में वाले पीर और हम फासिस्ट, ये सब जनरल डायर की औलाद हैं.
बाल ठाकरे के सहयोगी जॉर्ज को पानी पीने के लिए पूछता तो बाल ठाकरे कहते हैं कि इन्हें पानी पिलाओ, बहुत प्यास लगी है. इसके बाद जॉर्ज उठते हैं और पानी पीते हैं. बाल ठाकरे कहते हैं कि तुम्हारे लोकतंत्र की वजह से हमारे 75 बच्चे मारे गए. इसी दौरान मुख्यमंत्री के यहां से कुछ लोग बाल ठाकरे से मिलने आते हैं. जॉर्ज निकलते हुए कहते हैं कि बाल अपना ख्याल रखना है. जॉर्ज ही मुंबई को बंद नहीं कर सकता है. अब बाल ठाकरे भी मुंबई जलाता है तो दिल्ली भी जलकर लाल हो जाती है. अपना ख्याल रखना. इस पर बाल ठाकरे कहते हैं कि जॉर्ज अंधेरा मिटाने के लिए कभी-कभी सूर्य को उगाना पड़ता है.
साहिल जोशी