मधुबन डेम से छोड़ा 70 हजार क्यूसेक पानी, NDRF की तैनाती के साथ कई गांव अलर्ट

महाराष्ट्र में लोगों को इस बार भारी बारिश के कारण काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा है. जिसके बाद अब महाराष्ट्र में भारी बारिश के चलते मधुबन डैम से 70,000 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है. इसके बाद दमन के आसपास के 15 गांव को अलर्ट कर दिया गया है और साथ ही एनडीआरएफ की टीम की भी तैनाती की जा चुकी है.

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दमन के 15 गांव अलर्ट पर (फोटो- NDRF) दमन के 15 गांव अलर्ट पर (फोटो- NDRF)

गोपी घांघर

  • मुंबई,
  • 31 जुलाई 2019,
  • अपडेटेड 10:19 PM IST

महाराष्ट्र में लोगों को इस बार भारी बारिश के कारण काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा है, जिसके बाद अब महाराष्ट्र में भारी बारिश के चलते मधुबन डैम से 70,000 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है. इसके बाद दमन के आसपास के 15 गांव को अलर्ट कर दिया गया है और साथ ही एनडीआरएफ की टीम की भी तैनाती की जा चुकी है.

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बीते गुरुवार को दक्षिण गुजरात को भारी बारिश की मार झेलनी पड़ी.  तापी जिले में सबसे ज्यादा 6 इंच तक बारिश हुई. इस वजह से नदियों का जलस्तर बढ़ गया. जबकि उकाई बांध में जलस्तर 278.79 फुट तक पहुंच गया. गुरुवार को मधुबन डैम का जलस्तर 73.25 मीटर तक पहुंच गया था. बांध की देखरेख करने वाले अधिकारियों ने बारिश के पानी को कम करने के लिए बांध के सभी 8 दरवाजे खोल दिए ताकि जलस्तर दो फुट तक कम हो जाए.

देश के कई हिस्से भारी बारिश और बाढ़ की मार झेल रहे हैं. बीते शनिवार को मुंबई से 90 किलोमीटर दूर महाराष्ट्र के वांगनी में महालक्ष्मी एक्सप्रेस बाढ़ के पानी में फंस गई थी. इसके बाद बड़े स्तर पर ऑपरेशन चलाकर ट्रेन से 1050 यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाला गया. बचाए गए लोगों में 9 गर्भवती महिलाएं भी शामिल थीं. इस ऑपरेशन में एनडीआरएफ, वायुसेना, रेलवे अधिकारियों और भारतीय नौसेना शामिल थे.दूसरी ओर बिहार भी बाढ़ से बेहाल है.

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13 जिलों में आई बाढ़ से अब तक 130 लोगों की मौत हो चुकी है. जबकि 88 लाख 46 हजार की आबादी प्रभावित हुई है. हालांकि नदियों का जलस्तर घट रहा है. लेकिन कई नदियां खतरे के निशान के ऊपर बह रही हैं. 130 में से सबसे ज्यादा 37 मौतें सीतामढ़ी में हुईं. 30 लोग मधुबनी और दरभंगा में 14 लोग मारे गए.बाढ़ के कारण हुए नुकसान और मुआवजे के लिए नीतीश कुमार सरकार बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों में सर्वे करा रही है. बुधवार से सर्वे का काम भी शुरू कर दिया गया है.फसलों के नुकसान के अलावा नष्ट हुए मकान और पशुओं की मौत का भी ब्योरा जिलों से मांगा गया है. सर्वे के आधार पर ही नुकसान का मुआवजा दिया जाएगा.

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