मध्‍य प्रदेश चुनाव: थांदला सीट पर कांग्रेस के वीर स‍िंह भूर‍िया जीते

मध्य प्रदेश में संपन्न हुए विधानसभा चुनाव के नतीजे आ गए है. थांदला विधानसभा सीट पर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के मौजूद विधायक कलसिंह भाबर और कांग्रेस के वीर सिंह भूरिया के अलावा बीजेपी के बागी दिलीप कटारा के मैदान में होने से मुकाबला त्रिकोणीय हो सकता था. कांग्रेस उम्‍मीदवार ने 95720 वोट पाकर जीत हास‍िल की. बीजेपी को 64569 वोट म‍िले.

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aajtak.in

  • भोपाल,
  • 11 दिसंबर 2018,
  • अपडेटेड 5:15 PM IST

मध्य प्रदेश में संपन्न हुए विधानसभा चुनाव के नतीजे आ गए है. थांदला विधानसभा सीट पर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के मौजूद विधायक कलसिंह भाबर और कांग्रेस के वीर सिंह भूरिया के अलावा बीजेपी के बागी दिलीप कटारा के मैदान में होने से मुकाबला त्रिकोणीय हो सकता था. कांग्रेस उम्‍मीदवार ने 95720 वोट पाकर जीत हास‍िल की. बीजेपी को 64569 वोट म‍िले.

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थांदला विधानसभा एक आदिवासी बाहुल्य इलाका है और यह सीट अनुसूचित जनजाति के लिए सुरक्षित है. यह क्षेत्र गुजरात और राजस्थान की सीमा को छूता है और सीमांत होने की वजह से इलाका पिछड़ गया है. सीट पर करीब 2.10 लाख वोटर हैं जिनमें महिला और पुरुष वोटरों की संख्या करीब-करीब बराबर ही है.

2013 चुनाव के नतीजे

कलसिंह भाबर ने इस बार बीजेपी का साथ छोड़ निर्दलीय चुनाव लड़ा और कांग्रेस के गेंदाल डामोर को करीब 5 हाजर वोटों से शिकस्त दी. बीजेपी इस चुनाव में तीसरे स्थान की पार्टी रही जिसे करीब 16 फीसद वोट हासिल हुए.

2008 चुनाव के नतीजे

इस चुनाव में कांग्रेस के वीर सिंह भूरिया ने बीजेपी के कलसिंह भाबर को करीब 8 हजार वोटों से हराया था. समाजवादी पार्टी और बसपा इस चुनाव में ज्यादा वोट पाने में असफल रहीं.

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मध्यप्रदेश की ज्यादातर सीटों पर मुख्य मुकाबला बीजेपी और कांग्रेस के बीच है. लेकिन कुछ सीटों पर बीएसपी का भी प्रभाव है. यहां 2003 से बीजेपी की सरकार है और इससे पहले 10 साल तक कांग्रेस ने राज किया था. 2013 के विधानसभा चुनाव में कुल 230 विधानसभा सीटों में से बीजेपी ने 165 सीटें जीतकर सरकार बनाई थी. कांग्रेस 58 सीटों तक सिमट गई थी. जबकि बसपा ने 4 और अन्य ने 3 सीटों पर जीत हासिल की थी.

2013 में राज्य में क्या थे चुनावी नतीजे

मध्य प्रदेश में कुल 231 विधानसभा सीटें हैं. 230 सीटों पर चुनाव होते हैं जबकि एक सदस्य को मनोनीत किया जाता है. 2013 के चुनाव में बीजेपी को 165, कांग्रेस को 58, बसपा को 4 और अन्य को तीन सीटें मिली थीं.

इस बार की वोटिंग में महिलाओं की भागीदारी बढ़ी

निर्वाचन आयोग के मुताबिक इस बार मध्य प्रदेश में 75.05 फीसदी मतदान हुआ. जबकि 2013 में 72.07 प्रतिशत मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया था. इस बार महिलाओं का मतदान प्रतिशत पिछले चुनाव के मुकाबले करीब 4 फीसदी बढ़कर 74.03 प्रतिशत रहा. 2013 में महिलाओं का मतदान प्रतिशत 70.11 प्रतिशत रहा था.

कितने लोगों ने किया मताधिकार का प्रयोग

निर्वाचन आयोग के मुताबिक 2013 में मध्य प्रदेश में कुल 4,66,36,788 मतदाता थे जिनमें महिला मतदाताओं की संख्या 2,20,64,402 और पुरुष मतदाताओं की संख्या 2,45,71,298 और अन्य वोटर्स 1088 थे. 2013 में 72.07 प्रतिशत मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया था.

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इसके पहले कैसा रहा है वोटिंग का प्रतिशत

मध्‍य प्रदेश में 1990 में स्व. सुंदरलाल पटवा के नेतृत्व में भाजपा मैदान में उतरी और 4.36 फीसदी वोट बढ़ गए. तत्कालीन कांग्रेस की सरकार को हार का सामना करना पड़ा था. इसके बाद 1993 में पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के नेतृत्व में कांग्रेस चुनाव में उतरी तो 6.03 प्रतिशत मतदान बढ़ा और बीजेपी की पटवा सरकार हार गई थी.

वहीं, 1998 में वोटिंग प्रतिशत 60.22 रहा था जो 1993 के बराबर ही था. उस वक्त दिग्विजय सिंह की सरकार बनी. लेकिन 2003 में उमा के नेतृत्व में भाजपा सामने आई और दिग्विजय सिंह की 10 साल की सरकार सत्ता से बाहर हो गई. उस वक्त भी 7.03 प्रतिशत वोट बढ़े थे.

पिछले तीन बार से शिवराज सूबे के मुख्‍यमंत्री

2003 में मुख्‍यमंत्री बनी उमा भारती के इस्तीफे के बाद सूबे के वरिष्ठ नेता बाबूलाल ने 23 अगस्त 2004 को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली. बाबूलाल गौर के 29 नवंबर 2005 को पद छोड़ने पर शिवराज ने प्रदेश की बागडोर संभाली और 2008 और 2013 का विधानसभा चुनाव भी जिताने में सफल रहे. पिछले 13 वर्षों से राज्य में सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहने का रिकॉर्ड शिवराज के नाम दर्ज है.

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