'सपाक्स पार्टी' गठित होने के 48 घंटे के अंदर ही विवादों में आ गई है. पार्टी के पूर्व संस्थापक ललित शास्त्री ने आरोप लगाया कि सपाक्स पार्टी बनाते वक्त नियमों का पालन नहीं किया गया. दरअसल, मंगलवार को सपाक्स ने आंदोलन से आगे बढ़ते हुए राजनीतिक पार्टी लॉन्च की थी और मध्य प्रदेश विधानसभा की सभी 230 सीटों पर उम्मीदवार उतारने का ऐलान किया था.
इसके बाद 48 घंटे के भीतर ही सपाक्स पार्टी विवादों में आ गई, क्योंकि इसके पूर्व संस्थापक ललित शास्त्री ने पार्टी के गठन पर सवाल उठाते हुए इसे अवैध बताया है. उनके मुताबिक सिर्फ वही पार्टी चुनाव मैदान में उतर सकती है, जिसे चुनाव आयोग की तरफ से मान्यता मिली हो, लेकिन सपाक्स पार्टी के साथ ऐसा नहीं है. आचार संहिता लागू होने से पहले मान्यता नहीं मिली तो सपाक्स पार्टी चुनाव नहीं लड़ सकेगी.
शास्त्री ने बताया कि वो पहले ही सपाक्स पार्टी से अलग होकर एक नई पार्टी 'अनारक्षित समाज पार्टी' में शामिल हो चुके हैं, जिसे न केवल चुनाव आयोग से मान्यता प्राप्त है, बल्कि चुनाव चिन्ह भी मिला हुआ है. वहीं, सपाक्स पार्टी ने इसका खंडन करते हुए कहा कि ललित शास्त्री पहले ही सपाक्स का साथ छोड़ चुके हैं. ऐसे में उनके बयान का कोई महत्व नहीं रह जाता है.
सपाक्स पार्टी के हीरालाल त्रिवेदी के मुताबिक चुनाव आयोग में पार्टी के रजिस्ट्रेशन के लिए प्रक्रिया शुरू कर दी गई है. पार्टी के रजिस्ट्रेशन के लिए कागज़ात चुनाव आयोग को भेज दिए हैं और आयोग ने इस संबंध में अधिसूचना भी जारी कर दी है. त्रिवेदी ने बताया कि चुनाव आयोग ने पेपर में विज्ञापन देकर आपत्तियां भी मांगी हैं. मध्य प्रदेश में प्रमोशन में आरक्षण और एट्रोसिटी एक्ट को लेकर वैसे भी माहौल गर्म है और ऐसे में सामान्य वर्ग का आपस मे गुट बना लेना कहीं न कहीं पूरे आंदोलन के लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं है.
राम कृष्ण / रवीश पाल सिंह