मध्य प्रदेश की राजनीति में पिछले कुछ सालों से नेताओं पर सबसे ज्यादा आरोप रेत का अवैध उत्खनन और उसके परिवहन के नाम पर लगे हैं. यहां तक कि कई बार इसमें लोगों की जान तक चली गई. कुल मिलाकर मध्य प्रदेश की राजनीति का रेत से नाता अब नदी की ही तरह गहरा हो चुका है.
इसी रेत को लेकर अब नर्मदा न्यास के अध्यक्ष कंप्यूटर बाबा अपने समर्थकों के साथ इन दिनों नर्मदा नदी में हो रहे रेत के अवैध उत्खनन को रोकने संतों की टोली के साथ नर्मदा किनारे घूम रहे हैं.
शनिवार शाम कंप्यूटर बाबा सीहोर के नसरुल्लागंज पहुंचे. इसके बाद अपने समर्थक संतों के साथ आमाबढ़ गांव में नर्मदा किनारे टैंट लगाकर बैठ गए. दरअसल, कंप्यूटर बाबा ने इन दिनों नर्मदा नदी में हो रहे अवैध रेत उत्खनन के खिलाफ मुहिम चला रखी है.
अवैध तरीके से रेत निकालने का काम
सरकार की नई रेत खनन नीति के तहत नदियों से रेत निकालने के लिए मशीनों का उपयोग पूरी तरह प्रतिबंधित है, लेकिन कई जगहों पर अभी भी मशीनों के जरिए अवैध तरीके से रेत निकालने का काम चल रहा है, जिसको रोकने के मकसद से नर्मदा न्यास के अध्यक्ष कंप्यूटर बाबा और उनके समर्थक संत नदियों के किनारे-किनारे चल रेत के अवैध उत्खनन और उसके परिवहन को रोकने का काम कर रहे हैं. कंप्यूटर बाबा के मुताबिक, इस दौरान वो खुद और साधू-संत अलग-अलग जगहों पर नर्मदा किनारे तंबू गाड़कर रेत के घाटों की निगरानी करेंगे.
'संतों के साथ छापा मारेंगे'
बता दें कि हाल ही में खनिज मंत्री प्रदीप जायसवाल ने कंप्यूर बाबा को नसीहत देते हुए कहा था कि वो बाबा हैं, उनको बाबागिरी करनी चाहिए और खनिज विभाग से कोई लेना-देना नहीं है. हालांकि, इसके बावजूद कंप्यूटर बाबा ने साफ कर दिया था कि वो पीछे नहीं हटेंगे और नर्मदा नदी में जहां-जहां खदानों से रेत का अवैध उत्खनन हो रहा होगा वहां सीधे संतों के साथ जाकर छापा मारेंगे.
रवीश पाल सिंह