मध्य प्रदेश: थानेदार का 8 महीने में 10 बार तबादला, हाईकोर्ट में सुनवाई

बैतूल जिले के सारणी थाना प्रभारी सुनील लाटा ने जबलपुर हाईकोर्ट में अपने लगातार हो रहे तबादलों के खिलाफ याचिका लगाई है. सुनील लाटा का आरोप है कि बीते 8 महीनों में उनके 10 तबादले हो चुके हैं, जिसकी वजह से उन्हें ज्यादा मानसिक तनाव झेलना पड़ रहा है.

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सुनील लाटा (फोटो- रवीश पाल सिंह) सुनील लाटा (फोटो- रवीश पाल सिंह)

रवीश पाल सिंह

  • भोपाल,
  • 02 सितंबर 2019,
  • अपडेटेड 9:46 AM IST

  • मध्य प्रदेश में एक थानेदार का 8 महीने में 10 बार ट्रांसफर
  • तबादले से परेशान थानेदार ने जबलपुर कोर्ट में लगाई याचिका

मध्य प्रदेश की कमलनाथ सरकार शुरुआत से ही धड़ाधड़ तबादलों में लग गई थी. हालात यह बन गए थे कि विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी ने कमलनाथ सरकार पर तबादला उद्योग चलाने का आरोप तक लगा दिया था. वहीं राज्य में लगातार हो रहे तबादलों की बीच मध्य प्रदेश पुलिस के एक थानेदार ने जबलपुर हाईकोर्ट का रुख किया है.

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दरअसल, बैतूल जिले के सारणी थाना प्रभारी सुनील लाटा ने जबलपुर हाईकोर्ट में अपने लगातार हो रहे तबादलों के खिलाफ याचिका लगाई है. सुनील लाटा का आरोप है कि बीते 8 महीनों में उनके 10 तबादले हो चुके हैं, जिसकी वजह से उन्हें ज्यादा मानसिक तनाव झेलना पड़ रहा है. सुनील लाटा की याचिका पर जबलपुर हाईकोर्ट सुनवाई भी शुरू कर चुका है.

सुनील लाटा के मुताबिक उनके तबादलों की शुरुआत उस वक्त हुई जब मध्य प्रदेश में नई सरकार बनने के बाद उनका पहला तबादला बैतूल से होशंगाबाद के आईजी ऑफिस में हुआ. सुनील लाटा के मुताबिक इसके कुछ समय बाद उनका तबादला होशंगाबाद से बीएचयू कर दिया गया. वहीं बीएचयू में ही उनका एक बार फिर तबादला हुआ जब उन्हें हेडक्वार्टर के आदिम जाति कल्याण शाखा में भेज दिया गया. इसके बाद एक बार फिर से सुनील लाटा को बैतूल भेजा गया जहां उन्होंने आदिम जाति कल्याण शाखा में जॉइन किया. इसके बाद सुनील लाटा का सागर, छतरपुर और भोपाल तबादला हुआ.

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भोपाल से सुनील लाटा को एक बार फिर ट्रांसफर करके बैतूल भेजा गया. इसके बाद सारणी थाने में उनका ट्रांसफर किया गया. वहीं 2 दिन पहले ही सुनील लाटा का निवाड़ी ज़िले में तबादला हुआ है. लगातार हो रहे तबादलों पर आजतक से बात में सुनील लाटा ने कहा कि शुरुआत में उन्हें परेशानी नहीं हुई क्योंकि नई सरकार बनने में तबादले होना आम बात है. लेकिन जब एक के बाद एक कई तबादले होते रहे तो उन्हें कोर्ट की शरण लेनी पड़ी.

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