MP चुनाव में कांग्रेस टिकट चाहिए तो पहले पार्टी फंड में देना होगा 50,000 चंदा

ऐसे में विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की मध्य प्रदेश इकाई के कंधों पर फंड जुटाने की बड़ी जिम्मेदारी आ गयी है. प्रदेश कांग्रेस ने इसके लिए कवायद भी शुरू कर दी है.

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प्रतीकात्मक तस्वीर प्रतीकात्मक तस्वीर

खुशदीप सहगल / कुमार विक्रांत

  • नई दिल्ली,
  • 26 फरवरी 2018,
  • अपडेटेड 6:43 PM IST

मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव तो इस साल के आखिर में होने हैं लेकिन कांग्रेस को फंड की चिंता अभी से सता रही है. मध्य प्रदेश की सत्ता से कांग्रेस करीब 15 साल से बाहर है. 2014 में कांग्रेस केंद्र की सत्ता से भी बाहर हो चुकी है. यहीं नहीं पिछले कुछ दौर में कांग्रेस को कई राज्यों में भी चुनाव के बाद सत्ता से बेदखल होना पड़ा है. देखा जाए तो बड़े राज्यों में कर्नाटक और पंजाब में ही कांग्रेस की सरकार है. कर्नाटक में अगले दो-तीन महीने में ही विधानसभा चुनाव होने हैं.   

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कमोवेश जो स्थिति है उसमें कांग्रेस के लिए चंदा जुटाना टेढ़ी खीर से कम नहीं है. पार्टी की केंद्रीय कमान ने भी राज्य विधानसभा चुनावों में सीमित फंड देने के लिए ही हामी भरी है.  

ऐसे में विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की मध्य प्रदेश इकाई के कंधों पर फंड जुटाने की बड़ी जिम्मेदारी आ गयी है. प्रदेश कांग्रेस ने इसके लिए कवायद भी शुरू कर दी है. ऐसे में तरह तरह के प्रस्ताव उसने तैयार किये हैं. इनमें सबसे दिलचस्प प्रस्ताव है- टिकट की आस रखने वालों से चन्दा लेना. इस प्रस्ताव पर प्रदेश कांग्रेस और प्रभारी महासचिव दीपक बावरिया के बीच चर्चा भी हो चुकी है.

इस बाबत पूछे जाने पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अरुण यादव ने आजतक को बताया, “हां, टिकटार्थियों से चंदा लेने का प्रस्ताव है, जिस पर अभी चर्चा हो रही है. प्रस्ताव ये है कि, राज्य की 230 विधानसभा सीटों पर जो भी कांग्रेस का उम्मीदवार बनने की इच्छा रखता है, उसको एक उम्मीदवारी का फॉर्म भरना होगा और साथ में 50 हजार रुपये भी चन्दे के तौर पर जमा कराने होंगे. पार्टी को लगता है कि, राज्य के आज के हालात में एक सीट पर कई-कई उम्मीदवार चुनाव लड़ना चाहते हैं, ऐसे में चुनाव लड़ने के लिए पार्टी फंड में ठीक ठाक पैसा इकट्ठा हो जाएगा.

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साथ ही पार्टी का एक तबका ये भी मानता है कि, इससे बेवजह टिकट मांगने वाले खुदबखुद किनारे हो जाएंगे और टिकट बंटवारे में होने वाली बेवजह की सिरदर्दी भी कम हो जाएगी. हालांकि, जब ये प्रस्ताव राज्य के नेताओं के सामने रखा गया तो ये सवाल भी उठा कि मध्य प्रदेश में कई गरीब इलाके हैं. ऐसे में वहां से उम्मीदवारी करने वाले पैसा कहां से लाएंगे और इससे कई अच्छे प्रत्याशी चुनाव लड़ने से अपने हाथ खींचने को मजबूर हो जाएंगे. साथ ही टिकट तो एक सीट से एक को ही मिलेगा, बाकियों के पैसे तो वापस मिलेंगे नहीं.

इस सवाल के बावजूद पार्टी को लगता है कि आज के दौर में गंभीरता से विधानसभा के चुनाव लड़ने का इच्छुक 50 हजार की रकम को चन्दा करके पार्टी फंड में दे ही सकता है. पार्टी नेता मानते हैं कि बीजेपी चुनाव प्रचार में अनाप शनाप पैसा खर्च करती आई है और मध्य प्रदेश में भी करेगी. ऐसे में आखिर चुनाव लड़ने के लिए भी पार्टी को फंड तो चाहिए वरना प्रचार में कमी की वजह से पार्टी पिछड़ी तो ये तो ज्यादा नुकसानदेह होगा.

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