BSF ग्वालियर में यूक्रेन के कुत्तों को कर रहा प्रशिक्षित

सीमा सुरक्षा बल अपनी अकादमी में यूक्रेन के लिए कुत्तों को प्रशिक्षित कर रहा है. इन कुत्तों का प्रशिक्षण पूरा होने के बाद उन्हें यूक्रेन ले जाया जाएगा.

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बीएसएफ का नेशनल ट्रेनिंग सेंटर फॉर डॉग बीएसएफ का नेशनल ट्रेनिंग सेंटर फॉर डॉग

जितेंद्र बहादुर सिंह / सुरेंद्र कुमार वर्मा

  • नई दिल्ली,
  • 05 अक्टूबर 2018,
  • अपडेटेड 4:01 PM IST

सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) का नेशनल ट्रेनिंग सेंटर फॉर डॉग (एनटीसीडी) एक ऐसा डॉग ट्रेनिंग सेंटर है जहां देशभर के अलावा विश्व के भी कई नस्लों के डॉग्स को ट्रेनिंग दी जाती है.

बीएसएफ ग्वालियर के टेकनपुर स्थित बीएसएफ अकादमी में इस बार यूक्रेन के 2 दर्जन से ज्यादा बेल्जियन मेलिनोइस किस्म के डॉग्स को खास ट्रेनिंग दे रहा है. मिली जानकारी के मुताबिक यूक्रेन खास नस्ल के इन कुत्तों को बीएसएफ के जरिए ट्रेंड कराकर अपने देश लेकर जाएगा.

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बीएसएफ इन खास तरीके से प्रशिक्षित कुत्तों का इस्तेमाल बॉर्डर एरिया में स्मगलिंग रोकने, आतंकी घुसपैठ का पता लगाने और आतंकी हाइड आउट को नष्ट करने में करता रहा है. उसकी इसी खूबी को देखकर यूक्रेन के सुरक्षा बल अपने कुत्तों को खास तरीके की ट्रेनिंग टेकनपुर बीएसएफ अकादमी में दिलवा रहा है.

बीएसएफ के मुताबिक इससे पहले बीएसएफ की यह अकादमी दिसंबर 2015 में बांग्लादेश की बॉर्डर गार्डिंग फोर्स (बीजीबी) के 40 स्निफर डॉग्स को ट्रेनिंग दे चुका है. भारत-बांग्लादेश बॉर्डर गार्ड फोर्स के बीच में मैत्री संबंध होने के चलते बीएसएफ में इस तरीके के खास डॉग्स को बांग्लादेश के लिए ट्रेंड किया है.

इसके अलावा बीएसएफ मंगोलिया, नेपाल, भूटान और दूसरे अन्य देशों के कई तरीके के डॉग्स ब्रीड को इस अकादमी में ट्रेनिंग दे चुका है.

बीएसएफ एनटीसीडी में खास ट्रेंड डॉग की पूरी ब्रीड रखता है. बीएसएफ ने अपनी अकादमी में 'बेल्जियन मालीनोइस' नस्ल के करीब 3 दर्जन डॉग्स को रखा है. ये बीएसएफ के खास डॉग कमांडो है जो आतंकवाद और स्मगलिंग निरोधक अभियान के आवश्यक अंग हैं.

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दुनियाभर में अलग-अलग सुरक्षा बलों में आतंकवाद के खिलाफ अभियान में ऐसे कुत्तों की बड़ी अहमियत होती है. बेल्जियन मेलोनोइस किस्म के ये डॉग बड़े सिर और चौड़ी नाक वाले होते हैं जो बगैर किसी गलती के संदिग्ध लोगों, विस्फोटकों और आईइडी की गंध पहचान कर सकता है. यह कुत्ता अपने सिर के इशारे से बड़ी अच्छी जानकारी दे सकता है.

यह अन्य खोजी कुत्तों की तरह भौंककर इशारा नहीं करता, जिससे संदिग्धों के सतर्क होने की आशंका होती है. बीएसएफ अधिकारियों के मुताबिक बीएसएफ के कमांडो अब तक जर्मन शेफर्ड और लेब्राडोर जैसे कुत्तों की मदद ऑपरेशन में लेते रहे हैं, लेकिन नई नस्ल के कुत्ते से उनके विशेष अभियान को और ज्यादा धार मिलेगा. यही वजह है कि यूक्रेन जैसे देश बीएसएफ से अपने कुत्तों को ट्रेंड करा रहा है.

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