मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के कद्दावर नेता दिग्विजय सिंह ने भोपाल स्थित अपना सरकारी बंगला खाली कर दिया है. भोपाल के श्यामला हिल्स से रविवार को 3 ट्रक में भरकर सामान शिफ्ट कर दिया गया.
बता दें कि इससे पहले हाइकोर्ट ने सभी पूर्व मुख्यमंत्रियों के बंगले खाली कराने का आदेश दिया था जिसके बाद सरकार ने भी आदेश जारी कर पूर्व मुख्यमंत्रियों के सरकारी बंगले का आवंटन निरस्त कर दिया था. हालांकि बाद में नए आदेश जारी कर पूर्व मुख्यमंत्रियों को उनके बंगले फिर से दे दिए गए और असल खेल भी इसी में हुआ.
पूर्व मुख्यमंत्रियों को सरकारी बंगला दोबारा अलॉट करते समय शिवराज सरकार ने बीजेपी के पूर्व मुख्यमंत्रियों का ध्यान तो रखा लेकिन कांग्रेस सरकार में सीएम रहे दिग्विजय सिंह को किनारे कर दिया.
पिछले महीने जब शिवराज सरकार ने जिन पूर्व मुख्यमंत्रियों को सरकारी बंगले फिर से अलॉट किये उनमें बीजेपी की उमा भारती, बाबूलाल गौर और कैलाश जोशी के नाम तो थे लेकिन 10 साल तक एमपी के मुख्यमंत्री रहे कांग्रेस के दिग्विजय सिंह का नाम नहीं था. कांग्रेस ने इस मुद्दे पर पहले भी शिवराज सरकार पर भेदभाव का आरोप लगाया था.
19 जुलाई को आया था हाईकोर्ट का आदेश
19 जुलाई को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एक जनहित याचिका पर फैसला सुनाते हुए प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्रियों को निशुल्क आजीवन सरकारी आवास की सुविधा के प्रावधान को अवैधानिक करार देते हुए एक महीने में कार्रवाई करने के आदेश दिए थे.
कोर्ट के इस फैसले के मद्देनजर प्रदेश सरकार ने चार पूर्व मुख्यमंत्रियों जिनमें कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह भी शामिल हैं, के बंगलों का आवंटन निरस्त कर दिया था. कोर्ट के आदेश के बाद शिवराज सरकार ने दिग्विजय सिंह समेत चारों पूर्व मुख्यमंत्रियों से वाजिब वजह के साथ बंगले फिर से आवंटित करने की अपील का आह्वान किया था. जिसके बाद बीजेपी के तीनों नेताओं ने बंगले अलॉट करने की मांग की, जबकि दिग्विजय सिंह ने ऐसा नहीं किया.
रवीश पाल सिंह / दीपक कुमार