'कोर्ट कहेगा तो बांट दूंगी कुरान, लेकिन लिखित आदेश तो मिले'

आपत्तिजनक पोस्ट पर रांची की अदालत ने एक लड़की को जमानत देते हुए कोर्ट ने यहशर्त रखी है कि 15 दिनों के भीतर उसे कुरान की 5 कॉपियां बांटनी होंगी. 'आजतक' के दंगल प्रोग्राम में बातचीत करते हुए उन्होंने बताया कि मुझे इस आदेश से कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन इसके लिए मेरे पास कोई लिखित आदेश नहीं है.

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ऋचा भारती (Photo- AajTak) ऋचा भारती (Photo- AajTak)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 16 जुलाई 2019,
  • अपडेटेड 8:51 PM IST

रांची की ऋचा भारती ने सोशल मीडिया पर एक आपत्तिजनक टिप्पणी की थी, जिसके लिए उन्हें दो दिनों के लिए जेल में डाल दिया गया. बाद में उन्हें इस शर्त पर जमानत मिली कि वो 15 दिनों के भीतर 5 कॉपियां बांटेंगी. 'आजतक' चैनल के दंगल प्रोग्राम में आज (मंगलवार) की बहस रांची की अदालत के आदेश को लेकर हुई.

दंगल प्रोग्राम में बातचीत करते हुए ऋचा भारती (पोस्ट शेयर करने वाली लड़की) ने कहा कि सोशल साइट पर मैंने किसी और का पोस्ट शेयर किया था, तो पहले उस पर कार्रवाई होनी चाहिए. ऋचा ने कहा कि मेरी पोस्ट किसी की भावनाओं को आहत करने के लिए नहीं थी. साथ ही ऋचा ने कहा कि कुरान की 5 कॉपियां बांटने के मजिस्ट्रेट के आदेश से भी मुझे कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन इसके लिए मेरे पास कोई लिखित आदेश नहीं है.

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19 साल की ऋचा भारती कोर्ट के आदेश से संतुष्ट भी नहीं हैं. उनका कहना है कि मेरी पोस्ट आपत्तिजनक नहीं है. वहीं, झारखंड बीजेपी ने भी कोर्ट के इस फैसले को हैरान करने वाला बताया.

वहीं, इस मुद्दे को लेकर बीजेपी नेता तजिंदर पाल सिंह बग्‍गा ने ट्वीट किया-

बता दें कि रांची की 19 साल की ऋचा भारती ने मुसलमानों के खिलाफ आपत्तिजनक फेसबुक पोस्ट साझा की थी, जिसे लेकर वो कटघरे में हैं. हालांकि, मुद्दा ऋचा की फेसबुक पोस्ट से ज्यादा उन्हें जमानत के लिए मिली शर्त का बन गया है. रांची के ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट मनीष कुमार ने जमानत के लिए ऋचा को रिहाई के बाद 15 दिनों के भीतर कुरान की 5 कॉपियां बांटने का आदेश सुनाया है.

ग्रेजुएशन फर्स्ट ईयर की छात्रा ऋचा भारती अपनी फेसबुक पोस्ट को लेकर 2 दिनों तक जेल में रह चुकी हैं. उनके खिलाफ अंजुमन इस्लामिया नाम की संस्था ने शिकायत की थी. कोर्ट ने आदेश में कुरान की एक कॉपी अंजुमन इस्लामिया को और 4 कॉपियां रांची की किसी लाइब्रेरी में जमा कराने को कहा है.  

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ऋचा की गिरफ्तारी के बाद से ही VHP जैसे हिंदूवादी संगठन सड़कों पर उतर आए थे, लेकिन अब जमानत में रखी गई शर्त ने मामले को तूल दे दिया है. वहीं, 5 कुरान बांटने का आदेश देने वाली अदालत ने माना है कि ऋचा एक पढ़ाई-लिखाई करने वाली छात्रा है और उसका कोई धार्मिक या राजनीतिक झुकाव नहीं है, लेकिन अदालत का यह आदेश अपने आप में चर्चा की वजह बना गया है.

बता दें कि आपत्तिजनक टिप्पणी को लेकर पांच कुरान बांटने की शर्त पर जमानत पर बाहर आई ऋचा भारती ने पहले  निचली अदालत के फैसले को मानने से इनकार कर दिया था. उन्होंने कहा था कि वो ऊपरी अदालत का दरवाजा खटखटाएंगी.

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