झारखंड: आदिवासी जमीन की खरीद-बिक्री में थाना क्षेत्र की बाध्यता ख़त्म होगी

झारखंड की रघुवर दास सरकार आदिवासी जमीन की खरीद-बिक्री में थाना क्षेत्र की बाध्यता जल्द ख़त्म करेगी. इसके लिए मुख्यमंत्री ने बाकायदा एक कमेटी बनाई है.

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प्रतीकात्मक तस्वीर, झारखंड सरकार की वेबसाइट से साभार प्रतीकात्मक तस्वीर, झारखंड सरकार की वेबसाइट से साभार

धरमबीर सिन्हा

  • नई दिल्ली,
  • 27 अगस्त 2017,
  • अपडेटेड 7:29 PM IST

झारखंड की रघुवर दास सरकार आदिवासी जमीन की खरीद-बिक्री में थाना क्षेत्र की बाध्यता जल्द ख़त्म करेगी. इसके लिए मुख्यमंत्री ने बाकायदा एक कमेटी बनाई है. इस कमेटी में राज्य के कल्याण मंत्री लुइस मरांडी के नेतृत्व में बीजेपी विधायक मेनका सरकार, रामकुमार पाहन और बीजेपी नेता जेबी तुबिद को सदस्य बनाया गया है. यह कमेटी जल्द ही सभी प्रमंडल में आदिवासी जमीन की खरीद-बिक्री के औसत का आकलन करने सहित उसके दुष्प्रभाव पर भी अपनी रिपोर्ट सौपेंगी.

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दरअसल CNT-SPT एक्ट आदिवासियों की भूमि के लिए बनाया हुआ एक कानून है . CNT एक्ट के प्रावधानों के मुताबिक वे सिर्फ अपने थाना के अंतर्गत आने वाले आदिवासी जमीन की ही खरीद बिक्री हो सकती  है, वैसे यह प्रावधान है कि अनुसूचित जनजाति के भूमि का उपयोग खान और उद्योग के लिए किया जा सकता है और इसके लिए कमिश्नर की मंजूरी जरूरी है.

जनजातीय जनसंख्या में हो रही कमी का आकलन

दूसरी ओर आजादी के बाद से जनजातीय जनसंख्या में लगातार हो रही कमी का आकलन करने के लिए भी एक कमेटी बनाई गई है. राज्य के ग्रामीण विकास मंत्री नीलकंठ सिंह मुंडा के नेतृत्व में बनी इस कमेटी में बीजेपी विधायक ताला मरांडी, शिवशंकर उरांव, गंगोत्री कुजूर और बीजेपी नेता रतन टिर्की को रखा गया है. जनजातीय जनसंख्या कम होने के कारणों की स्टडी कर यह कमेटी अपनी रिपोर्ट देगी. यह कमिटी राज्य में 1947 से लेकर अबतक जनजातीय जनसंख्या में ह्रास के कारणों पर रिपोर्ट देगी.

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