झारखंड विधानसभा चुनावों में झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) के नेतृत्व वाले महागठबंधन को बहुमत मिला है. जेएमएम, कांग्रेस और आरजेडी (राष्ट्रीय जनता दल) ने चुनाव से पहले ही महागठबंधन का ऐलान किया था और उसी वक्त बतौर सीएम उम्मीदवार हेमंत सोरेन के नाम की घोषणा कर दी थी.
हेमंत सोरेन ने कहा कि आज का चुनाव परिणाम राज्य के इतिहास में नया अध्याय है और यह मील का पत्थर साबित होगा. उन्होंने विश्वास दिलाया कि लोगों की उम्मीदें वह टूटने नहीं देंगे.
उन्होंने स्पष्ट किया कि महागठबंधन पूरे राज्य के सभी वर्गों, संप्रदायों और क्षेत्रों की आकांक्षाओं का ख्याल रखेगा. हेमंत ने अपने पिता शिबू सोरेन, कांग्रेस अध्यक्षा सोनिया गांधी, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और लालू यादव का धन्यवाद किया और कहा कि आज के परिणाम सभी के परिश्रम का परिणाम है.
पहली बार कब बने सीएम?
झारखंड आंदोलन के प्रमुख नेता शिबू सोरेन के बेटे हेमंत सोरेन जुलाई-2013 में पहली बार राज्य के सीएम बने. साल 2009 में बड़े भाई दुर्गा सोरेन के असमय मौत के बाद हेमंत अचानक ही नेता बनकर उभरे.
साल 2000 में हेमंत सोरेन पहली बार निरसा विधानसभा उपचुनाव में उतरे, हालांकि बाद में उन्होंने एमसीसी (मार्क्सवादी समन्वय समिति) प्रत्याशी के समर्थन में अपना नामंकन वापस ले लिया. उसके बाद साल 2004 के विधानसभा चुनाव में वो जेएमएम की परंपरागत सीट दुमका से चुनाव लड़े लेकिन अपने ही पार्टी के बागी उम्मीदवार स्टीफन मरांडी के खिलाफ हार गए.
बड़े भाई दुर्गा सोरेन के असमय मौत के बाद हेमंत 2009 में पहली बार दुमका विधानसभा सीट पर जीत हासिल करने में सफल रहे. इतना ही नहीं साल 2010 में अर्जुन मुंडा के साथ मिलकर बीजेपी-जेएमएम गठबंधन सरकार में वो पहली बार राज्य के उपमुख्यमंत्री बने. उसके बाद जुलाई-2013 में वो राज्य के मुख्यमंत्री भी बने.
कैसे और क्यों बने सीएम?
हेमंत सोरेन के सीएम बनने की कहानी भी दिलचस्प है. दरअसल साल 2010 में जब वो अर्जुन मुंडा के साथ सरकार में शामिल हुए तो बीजेपी और जेएमएम के बीच एक डील हुई थी. इस डील के मुताबिक दोनों आधी-आधी अवधि तक मुख्यमंत्री रहने वाले थे. पहले आधे कार्यकाल में अर्जुन मुंडा सीएम बने और हेमंत डिप्टी सीएम लेकिन बात बीच में ही बिगड़ गई.
दो साल चार महीने सात दिन के बाद यह साझा सरकार गिर गई. राज्य में राष्ट्रपति शासन लगा. हालांकि बाद में कांग्रेस और राजद ने समर्थन देकर जुलाई-2013 में हेमंत सोरन को मुख्यमंत्री बना दिया और इस तरह राज्य में पहली बार जेएमएम-राजद-कांग्रेस गठबंधन की सरकार बनी.
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क्यों गई कुर्सी?
जेएमएम-राजद-कांग्रेस के साथ मिलकर हेमंत सोरेन ने एक साल पांच महीने पंद्रह दिनों तक सरकार चलाई. फिर विधानसभा चुनाव हुए. साल 2014 विधानसभा चुनाव में जेएमएम ने अकेले हेमंत सोरेन के नेतृत्व में चुनाव लड़ा. उनकी पार्टी को 19 सीटें मिलीं. लेकिन सरकार बनाने के लिए बहुमत बीजेपी को मिला और रघुवर दास के नेतृत्व में पांच साल की सरकार चली. झारखंड के इतिहास में पहली बार पांच साल की सरकार चली है.
हेमंत सोरेन की बड़ी उपलब्धियां
बतौर मुख्यमंत्री उन्होंने सरकारी नौकरियों में महिलाओं को 50 फीसदी आरक्षण देने जैसे महत्वपूर्ण निर्णय लिए. 2014 में हेमंत की पार्टी को 19 सीटें मिली थी. इसलिए वो झारखंड विधानसभा में प्रतिपक्ष के नेता बने. इस दौरान उन्होंने मुख्यमंत्री रघुवर दास के खिलाफ लंबी लड़ाई लड़ी.
उन्होंने रघुवर सरकार द्वारा भूमि अधिग्रहण कानून में संशोधन की कोशिशों का पुरजोर विरोध किया. बता दें कि रघुवर सरकार ने सीएनटी (छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम 1908) और एसपीटी (संताल परगना काश्तकारी अधिनियम-1949) एक्ट में संशोधन किया था.
हेमंत सोरेन और उनकी पार्टी इस बार जल-जंगल-जमीन के मुद्दे पर चुनाव लड़ रही है. इसके अलावा उन्होंने पिछड़ी जातियों के लिए 27 फीसदी आरक्षण का वादा किया है.
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हेमंत पर आरोप और विवाद
- बीजेपी का आरोप है कि हरमू में जिस जमीन पर मैरिज हॉल बना है, उसे हेमंत सोरेन ने अवैध तरीके से जमीन हासिल कर बनवाया है. बीजेपी के मुताबिक सोरेन परिवार के कब्जे में ऐसी कई जमीनें हैं, जिनकी वर्तमान कीमत करोड़ों में है. बीजेपी के मुताबिक हेमंत सोरेन ने साल 2014 में चुनाव आयोग के समक्ष जो हलफनामा दाखिल किया था, उसमें कई तथ्यों को छिपाया है.
30 मार्च 2007 के दिन का उल्लेख करते हुए बीजेपी ने कहा कि हेमंत सोरेन ने एक दिन में ही 16 रजिस्ट्री के जरिए विभिन्न स्थानों पर 5.28 एकड़ जमीन खरीदी.
आरोपों के मुताबिक सोरेन परिवार ने अपनी सभी संपत्तियों को अंडरवैल्यू करके दिखाया है. एक मोटे अनुमान के अनुसार सोरेन परिवार की संयुक्त संपत्ति 100 करोड़ से ज्यादा की है, लेकिन यह सिर्फ प्रारंभिक अनुमान है, इनकी वास्तविक संपत्ति कई गुना ज्यादा हो सकती है.
न बहुमत-न वापसी, 19 साल में कोई दल नहीं बदल पाया झारखंड का इतिहास
- हेमंत सोरेन का पैतृक निवास रामगढ़ है. ऐसे में सीएनटी एक्ट के प्रावधानों के मुताबिक वे सिर्फ अपने थाने के अंतर्गत आने वाली आदिवासी जमीन को ही खरीदने के अधिकारी है, लेकिन आरोप है कि उन्होंने इन नियमों को धता बताते हुए बोकारो, रांची, दुमका और धनबाद जैसे शहरों में संपत्ति अर्जित की. आरोप है कि अवैध तरीके से उनके द्वारा 100 करोड़ रुपये से अधिक की परिसंपत्ति अर्जित की गयी है.
दीपक सिंह स्वरोची