HC ने जम्मू-कश्मीर में पैलेट गन के इस्तेमाल में बैन लगाने से किया इनकार

जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट के जस्टिस अली मोहम्मद मागरे और जस्टिस धीरज सिंह ठाकुर की डिविजन बेंच ने फैसला सुनाते हुए कहा कि अगर कहीं पर हमला होता है, तो उस हालत में किस तरह के बल का इस्तेमाल करना है, इसका निर्णय वहां तैनात सुरक्षा बल के प्रभारी को लेना है.

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सांकेतिक तस्वीर सांकेतिक तस्वीर

शुजा उल हक

  • श्रीनगर,
  • 11 मार्च 2020,
  • अपडेटेड 6:15 PM IST

  • जस्टिस अली मोहम्मद मागरे और धीरज सिंह ठाकुर की बेंच ने सुनाया फैसला
  • जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने साल 2016 में दाखिल की थी PIL

जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने केंद्रशासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में पैलेट गन के इस्तेमाल पर बैन लगाने से इनकार कर दिया है. हाईकोर्ट का यह फैसला कश्मीर घाटी में तैनात सुरक्षा कर्मियों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है. जम्मू-कश्मीर में प्रदर्शनकारियों पर पैलेट गन का इस्तेमाल करने के खिलाफ साल 2016 में जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दाखिल की गई थी.

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इस याचिका में जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में पैलेट गन के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाने की मांग की गई थी. इस पीआईएल को जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने दाखिल किया था. जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट के जस्टिस अली मोहम्मद मागरे और जस्टिस धीरज सिंह ठाकुर की डिविजन बेंच ने फैसला सुनाते हुए कहा कि अगर कहीं पर हमला होता है, तो उस हालत में किस तरह के बल का इस्तेमाल करना है, इसका निर्णय वहां तैनात सुरक्षा बल के प्रभारी पर छोड़ देना चाहिए.

कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि बिना किसी सक्षम अथॉरिटी की जांच के बिना, हम यह फैसला नहीं कर सकते हैं कि किसी घटना में जरूरत से ज्यादा बल का इस्तेमाल किया गया या नहीं? आपको बता दें कि साल 2016 में कश्मीर में सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ के दौरान हिजबुल मुजाहिद्दीन के कमांडर और पोस्टर ब्वॉय बुरहान वानी के मारे जाने के बाद काफी विरोध प्रदर्शन हुआ था.

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इस दौरान प्रदर्शनकारियों द्वारा सुरक्षा बलों पर पथराव किए गए थे. उस समय सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनकारियों को काबू करने के लिए पैलेट गन का इस्तेमाल किया था. इसमें कई प्रदर्शनकारियों को चोट आई थी.

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जब पैलेट गन के इस्तेमाल के खिलाफ आवाज उठी, तो सरकार ने भी कहा था कि हम पैलेट गन की जगह किसी अन्य विकल्प पर विचार कर रहे हैं. पीआईएल को खारिज करते हुए जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने सरकार के इस कदम का भी जिक्र किया. कोर्ट ने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्रालय पैलेट गन की जगह किसी दूसरे विकल्प के इस्तेमाल को लेकर पहले से ही विशेषज्ञों की एक कमेटी गठित कर चुका है. जब सरकार इस पर कदम उठा चुकी है, तो हम कठिन हालातों में पैलेट गन के इस्तेमाल पर रोक नहीं लगा सकते हैं.

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जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने पैलेट गन के इस्तेमाल के खिलाफ दायर जनहित याचिका को उस समय खारिज किया है, जब सरकार अनुच्छेद 370 हटा चुकी है. सरकार ने 5 अगस्त 2019 को अनुच्छेद 370 हटा दिया था और जम्मू-कश्मीर को दो केंद्रशासित प्रदेशों में बांट दिया था. अब जम्मू-कश्मीर एक केंद्रशासित प्रदेश है.

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