इनके एक आइडिया ने बदल दी हिमाचल की किस्मत, अमेरिका से आए थे इंडिया

बात 1904 की है. तब सत्यानंद महज 22 साल के हुआ करते थे. वे एक बार अमेरिका से शिमला आए. यहां उन्होंने लैप्रोसी से जूझ रहे मरीजों की सेवा करना शुरू की. यह बात उनके परिवार को पसंद नहीं थी. क्योंकि, सत्यानंद अमीर परिवार से आते थे उनके पिता चाहते थे कि वे उनकी तरह बिजनेसमैन बने.

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सत्यानंद स्टोक्स ने हिमाचल में सबसे पहले शुरू की थी सेब की खेती. सत्यानंद स्टोक्स ने हिमाचल में सबसे पहले शुरू की थी सेब की खेती.

आदित्य बिड़वई

  • शिमला,
  • 25 अक्टूबर 2017,
  • अपडेटेड 4:28 PM IST

हिमाचल से कांग्रेस की दिग्गज नेता विद्या स्टोक्स के बारे में तो आपने सुना होगा, लेकिन यह बहुत कम लोग ही जानते हैं कि उनका ताल्लुक सत्यानंद स्टोक्स से भी है. बता दें कि सत्यानंद वही शख्स हैं, जो अमेरिका से सेब की खेती हिमाचल में सबसे पहले लाए और किसानों की किस्मत बदल दी.

बात 1904 की है. तब सत्यानंद महज 22 साल के हुआ करते थे. वे एक बार अमेरिका से शिमला आए. यहां उन्होंने लैप्रोसी से जूझ रहे मरीजों की सेवा करना शुरू की. यह बात उनके परिवार को पसंद नहीं थी. क्योंकि, सत्यानंद अमीर परिवार से आते थे उनके पिता चाहते थे कि वे उनकी तरह बिजनेसमैन बने.

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लेकिन सत्यानंद की कुछ और ही इच्छा थी. उन्होंने देखा कि हिमाचल की जलवायु ठंडी है और अमेरिका से मिलती जुलती है. इसके बाद उन्हें सेब उगाने का आइडिया आया और उन्होंने हिमाचल में सेब की खेती शुरू की. साल 1916 में फिलेडेल्फिया से सेब के कुछ पौधे और बीज मंगाए और खेती शुरू की.

सत्यानंद को नहीं मालूम था कि उनका ये आयडिया आने वाले समय में हिमाचल के लिए एक आर्थिक क्रांति साबित होगा. इसके बाद समय के साथ हिमाचल में सेब की खेती फैलती चली गई और आज हिमाचल का सेब पूरी दुनिया में मशहूर है.

बता दें कि अमेरिका के होते हुए भी सत्यानंद ने भारत की आजादी के लिए लम्बी लड़ाई लड़ी थी. साल 1919 में जलियावाला बाग़ हत्याकांड से उन्हें गहरा आघात पहुंचा था और उन्होंने कांग्रेस ज्वाइन की. बाद में उनकी महात्मा गांधी से भी दोस्ती हुई और उन्होंने सत्यानंद को पंजाब प्रोविंस कमिटी का मेंबर बना दिया. स्वतंत्रता संग्राम के दौरान वे कई बार जेल भी गई.

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बाद में उन्होंने हिन्दू धर्म अपना लिया और भारतीय लड़की से शादी की. उनका असली नाम सैमुएल स्टोक्स था जिसे बदलकर उन्होंने सत्यानंद रख लिया. 1946 में उनका लम्बी बीमारी के बाद निधन हो गया. 

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