कारगिल युद्ध में शहीद होने वाले अहमदाबाद के मुकेश राठौड़ अपने बेटे की शक्ल तक नहीं देख पाए. जब वो शहीद हुए थे, तब उनकी पत्नी गर्भवती थी. आज बेटा मृगेश 17 साल का हो चुका है. मुकेश भी पिता की तरह देश का नाम रोशन करना चाहता है, लेकिन बॉर्डर पर जाकर नहीं बल्कि फुटबॉल प्लेयर बनकर.
करगिल युद्ध को भले ही 17 साल बीत चुके हैं, लेकिन शहीद मुकेश की पत्नी की आंखों के आंसू आज भी सूखे नहीं हैं. पिता की फोटो देखते हुए मृगेश कहता है कि उसे अपने पापा की फोटो देखकर एक अलग जज्बा मिलता है, कुछ कर गुजरते की ताकत मिलती है.
दूसरी क्लास में पता चला पिता शहीद हो गए थे
मुकेश राठौड़ 28 जून 1999 को टाइगर हिल पर लड़ते हुए शहीद हुए थे. मृगेश को शहीद शब्द का मतलब तब पता चला, जब वो दूसरी क्लास में था. मृगेश बताते हैं, स्कूल की डायरी में मेरे पापा के नाम के आगे Martyr (शहीद) लिखा
था. मैंने डिक्शनरी में इसका मतलब ढूंढा तो पता चला मेरे पापा शहीद हो गए थे. अपने दम पर बेटे को पालने-पोसने वाली शहीद मुकेश की पत्नी को भी बेटे से बहुत उम्मीदें हैं और वे चाहती है कि बेटा अपने पिता का नाम रोशन करे.
मृगेश हाल में जब पहली कारगिल गया था तो वहां शहीदों की याद में बना मेमोरियल देखा. वह टाइगर हिल भी गया था. मृगेश देश के लिए फुटबॉल खेलना चाहता है.
रोहित गुप्ता / गोपी घांघर