गुजरात दंगों के इन चेहरों ने पेश की दोस्ती की मिसाल, बताई ये वजह

गुजरात दंगे के समय एक बना दंगा पीड़ित और दूसरा बना दंगा करने वाला चेहरा आज 17 साल बाद दोस्ती की मिसाल बन गया है.

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गुजरात दंगों के ये चेहर गुजरात दंगों के ये चेहर

गोपी घांघर

  • अहमदाबाद,
  • 06 सितंबर 2019,
  • अपडेटेड 10:17 PM IST

  • 2002 गुजरात दंगों के ये चेहरे बने दोस्त
  • कुतुबुद्दीन ने किया अशोक की दुकान का उद्घाटन
  • दुकान का नाम रखा 'एकता चप्पल घर'

गुजरात दंगे के समय एक बना दंगा पीड़ित और दूसरा बना दंगा करने वाला चेहरा आज 17 साल बाद दोस्ती की मिसाल बन गया है. 2002 के गुजरात दंगों के ये दोनों ही चेहरे अशोक मोची और कुतुबुद्दीन अंसारी कुछ यूं एक साथ नजर आएं.

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बता दें कि अहमदाबाद में कुतुबुद्दीन अंसारी ने मिलकर अशोक मोची की दुकान 'एकता चप्पल घर' का उद्घाटन किया. इस दुकान का नाम भी उन्होंने भाईचारे की मिसाल के तौर पर 'एकता चप्पल घर' रखा है.

दंगा पीड़ितों का चहेरा बने कुतुबुद्दीन अंसारी का कहना है कि हम यही चाहते हैं कि भारत में लोग भाईचारे के साथ रहे, इसी में सबकी भलाई है.

मालूम हो कि इस चप्पल घर की शुरुआत करने वाले अशोक मोची अब तक अहमदाबाद के फुटपाथ पर अपनी चप्पल रिपेयरिंग का ठेला लगा रहे थे. अशोक पर दंगों के मामले में अब भी मुकदमा चल रहा है.

वहीं, गुजरात दंगों में हिंदू आक्रोश का चेहरा बनकर उभरे अशोक मोची का कहना है, '2002 के दंगों की मेरी छवि गलत थी. इसलिए मुझे लगा कि अगर मैं अपनी दुकान की शुरुआत कुतुबुद्दीन अंसारी से कराउंगा तो लोगों के बीच एक अच्छा संदेश जाएगा.'

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गौरतलब है कि गुजरात में 2002 में दंगे जब चरम पर थे तब अशोक शाहपुर इलाके में कैमरे में कैद हुए थे. मीडिया में अशोक की तस्वीर आने के बाद वे गुजरात में मुस्लिम समुदाय के खिलाफ घृणा का प्रतीक बन गए थे.

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