वीडियो शेयरिंग ऐप टिक-टॉक इन दिनों गुजरात में भी छाया हुआ है. जहां एक ओर कुछ पुलिसकर्मियों को टिक-टॉक वीडियो बनाने के लिए सस्पेंड किया गया है, वहीं एक जगह टिक-टॉक ऐप की वजह से एक पुलिसकर्मी को सराहना भी मिली है.
बनासकांठा पुलिस ने एक नोटिफिकेशन जारी किया है, जिसमें कहा गया है कि अच्छे वीडियोज बनाने वाले पुलिसकर्मियों को अपनी प्रतिभा दिखाने के लिए प्लेटफॉर्म दिया जाएगा.
टिक-टॉक पर जारी बहस के बीच बनासकांठा पुलिस ने अपने नोटिफिकेशन में कहा है कि पुलिसकर्मी ड्यूटी के दौरान खाकी वर्दी या सिविल ड्रेस में टिक-टॉक वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर साझा न करें. अगर वे ऐसा करते हैं तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.
लेकिन इसी नोटिफिकेशन में यह भी कहा गया है कि जो योग्य हैं, वे टिक-टॉक वीडियो बनाकर पुलिस थाने में दें, प्रतिभा दिखाने का मौका दिया जाएगा.
दरअसल, हाल ही में गुजरात पुलिस तब चर्चा में आई जब टिक-टॉक वीडियो बनाने के लिए महिला कांस्टेबल को सस्पेंड कर दिया गया. गुजरात के मेहसाणा जिले में एक महिला कांस्टेबल अर्पिता चौधरी ने पुलिस थाने के अंदर फिल्मी गाने पर टिक-टॉक वीडियो बनाया था. थाने की जेल के बाहर बनाया गया यह वीडियो वायरल हो गया. इसके बाद उसे सस्पेंड कर दिया गया.
पिछले दो साल से महिला कांस्टेबल अर्पिता चौधरी, मेहसाणा के लंघनाज पुलिस थाने में ड्यूटी कर रही थी. अर्पिता चौधरी ने थाने की जेल के सामने एक टिक-टॉक वीडियो बनाया. फिल्मी गाने पर बनाया गया यह वीडियो वायरल हो गया.
इसी के बाद से गुजरात पुलिस में टिक-टॉक वीडियो बनाने की होड़ सी मच गई. हाल ही में एक और वीडियो वायरल हुआ था जिसमें पुलिसकर्मी ने पुलिस की गाड़ी का इस्तेमाल किया था. जिसके बाद पुलिस की खूब किरकिरी हुई. ऐसे में प्रोफेशनल मिसकंडक्ट के आरोप में पुलिसकर्मियों को स्पेंड भी किया गया था.
गोपी घांघर