गुजरातः कच्‍छ जिले में खुदाई के दौरान मिला पांच हजार साल पुराना कब्रिस्‍तान, 250 से ज्यादा कब्र

कच्‍छ के लखपत तालुका के खाटिया गांव में यह खुदाई कच्‍छ यूनिवर्सिटी और केरल यूनिवर्सिटी ने मिलकर की है. अंदाजा लगाया जा रहा है कि यहां मिली 250 से ज्‍यादा कब्रें करीब 4,500 से 5,000 साल पुरानी हैं. इनमे सबसे बड़ी कब्र 6.9 मीटर की, जबकि सबसे छोटी 1.2 मीटर की है.

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कच्‍छ में खुदाई के दौरान मिला हड़प्पायुगीन कब्रिस्‍तान (फोटो-गोपी) कच्‍छ में खुदाई के दौरान मिला हड़प्पायुगीन कब्रिस्‍तान (फोटो-गोपी)

गोपी घांघर

  • कच्‍छ ,
  • 13 मार्च 2019,
  • अपडेटेड 3:10 PM IST

गुजरात के कच्‍छ जिले में खुदाई के दौरान पांच हजार साल पुराना कब्रिस्‍तान मिला है. यहां करीब 250 कब्रों में शव के साथ मिट्टी के बर्तन और दूसरी चीजें रखी गई थी. गुजरात में यह पांच हजार साल पुराने हड़प्पायुगीन सभ्यता का अब तक का सबसे बड़ा आयताकार कब्रिस्‍तान है.

कच्‍छ जिले में पिछले दो महीनों से की जा रही खुदाई के बाद पुरातत्‍वविदों को हड़प्पा सभ्‍यता से जुड़ा एक विशाल कब्रिस्‍तान मिला है. धौलावीरा से लगभग 360 किलोमीटर दूर इस स्‍थान पर 250 से ज्‍यादा कब्रें हैं जो लगभग 5 हजार साल पुरानी हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि इससे इस बात की संभावना को बल मिलता है कि किसी समय में यहां मनुष्‍यों की अच्‍छी-खासी आबादी निवास करती थी.

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कच्छ में की गई खुदाई के दौरान मिला कब्र

कच्‍छ के लखपत तालुका के खाटिया गांव में यह खुदाई कच्‍छ यूनिवर्सिटी और केरल यूनिवर्सिटी ने मिलकर की है. अंदाजा लगाया जा रहा है कि यहां मिली 250 से ज्‍यादा कब्रें करीब 4,500 से 5,000 साल पुरानी हैं. यह कब्रिस्‍तान 300 मीटर x 300 मीटर आकार का है. इनमें से अभी तक 26 कब्रों की खुदाई हो चुकी है. इनमे सबसे बड़ी कब्र 6.9 मीटर की, जबकि सबसे छोटी 1.2 मीटर की है.

पुरातत्‍वविदों को यहां एक कब्र से छह फुट लंबा एक मानव कंकाल मिला, जो लगभग 5 हजार साल पुराना है. कच्‍छ यूनिवर्सिटी के पुरातत्‍व विभाग के प्रमुख सुरेश भंडारी ने बताया कि इस कंकाल को केरल यूनिवर्सिटी ले जाया गया है. यहां उसकी उम्र, लिंग और मृत्‍यु के संभावित कारणों का पता लगाया जाएगा.

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गुजरात में पहली बार आयताकार कब्रिस्‍तान मिला है. इससे पहले मिलने वाले कब्रिस्‍तान गोलाकार या अर्द्धगोलाकार आकार के थे. इन कब्रों में मानव कंकाल के अतिरिक्‍त बच्‍चों की कब्रें और जानवरों के अवशेष मिले हैं. खुदाई में सीपी के बने कंगन, पत्‍थर की चक्कियां और पत्‍थर के ब्‍लेड भी मिले हैं.

कब्रों में मिट्टी के बर्तन भी मिले हैं. एक कब्र में अधिकतम 19 और कम से कम 3 बर्तन शव के पैरों के पास रखे थे. पुरातत्‍वविदों का कहना है कि ऐसे बर्तन पाकिस्‍तान के आमरी, नाल और कोट से भी बरामद हुए हैं. भारत में उत्‍तरी गुजरात में ये कब्रिस्तान नागवाडा, छतराद सहेली, मोटी पीपली और कच्‍छ में सुरकोतड़ा और धानेती से मिले हैं.

पुरातत्‍वविद वी राजेश कहना है, 'खुदाई में मिले मिट्टी के बर्तनों, पत्‍थरों के ढेर और दूसरी चीजों के भूरासायनिक परीक्षण से हमें पता चलेगा कि इन्‍हें उस समय के लोगों ने किस तकनीक से बनाया, इन्‍हें बनाने में कौन से कच्‍चे माल का इस्‍तेमाल किया गया था. तमाम प्रयोगशालाओं में जांच के बाद हमें खाटिया के पास रहने वाले प्रारंभिक हड़प्पा युग के निवासियों के इतिहास की जानकारी मिलेगी.'

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