लोकसभा चुनाव में करारी हार का सामना करने के बाद दिल्ली की अरविंद केजरीवाल सरकार ने बड़ा फैसला लिया है. केजरीवाल सरकार ने सभी महिलाओं को मेट्रो और डीटीसी व क्लस्टर बसों में फ्री सफर का तोहफा दिया है. यह फैसला 2-3 महीनों में लागू हो जाएगा, लेकिन केजरीवाल सरकार ने इतना बड़ा कदम क्यों उठाया इसे लेकर भी सवाल उठ रहे हैं. विरोधी दावा कर रहे हैं कि विधानसभा चुनाव के मद्देनजर यह फैसला किया गया है.
दिल्ली बीजेपी के अध्यक्ष मनोज तिवारी ने कहा है कि अरविंद केजरीवाल दहशत में हैं और वो बौखला गए हैं. महिलाओं को फ्री में सफर की सुविधा देने वाले केजरीवाल सरकार के फैसले को मनोज तिवारी ने वोट खरीदने की नाकाम कोशिश बताया है. वहीं, आम आदमी पार्टी सूत्रों की मानें तो यह निर्णय जल्दबाजी में नहीं उठाया गया है.
पार्टी सूत्रों के मुताबिक, कई महीनों से इस मसले पर विमर्श चल रहा था जिसके बाद योजना का प्रस्ताव तैयार किया गया. परिवहन विभाग से महिला यात्रियों की संख्या भी पूछी गई और पूरा मूल्यांकन करने के बाद ड्राफ्ट तैयार किया गया. सरकार का कहना है कि इस संबंध में सबसे पहले डीएमआरसी और डीटीसी से ही सुझाव लिए गए हैं.
क्यों लिया यह फैसला?
अरविंद केजरीवाल सरकार के एक वरिष्ठ मंत्री का कहना है कि इस फैसले का असल मकसद महिलाओं को पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल करने के लिए प्रोत्साहित करना है. साथ ही महिला सुरक्षा भी एक बड़ी वजह बताई जा रही है. दरअसल, आम आदमी पार्टी दिल्ली में महिला सुरक्षा का मुद्दा प्रमुखता से उठाती रही है. बसों में सीसीटीवी कैमरे लगाने के दावे भी किए जाते रहे हैं. लेकिन इस दिशा में सरकार की तरफ से कोई ठोस कदम नहीं उठाए जाने पर केजरीवाल सरकार को विरोधियों से आलोचना झेलनी पड़ती है. शायद यही वजह है कि 3 जून को जब अरविंद केजरीवाल ने फ्री सफर की घोषणा की तो यह भी बताया कि अगले महीने (जून) से सीसीटीवी लगने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी और इस साल के अंत तक बड़ी संख्या में यह काम पूरा कर लिया जाएगा.
इसके अलावा सरकार के सूत्रों का ये भी कहना है कि इस कदम से मतदाताओं के एक बड़े हिस्से तक पहुंचा जा सकता है.
तुरंत लागू क्यों नहीं किया फैसला?
सरकार के एक वरिष्ठ मंत्री ने आजतक को बताया कि इस फैसले को तुरंत लागू करना मुमकिन नहीं है, क्योंकि इसके लिए बजट लाना होगा और विधानसभा सत्र बुलाना होगा. साथ ही इस दिशा में जनता के सुझाव का भी इंतजार किया जा रहा है.
बहरहाल, केजरीवाल सरकार का यह फैसला विधानसभा चुनाव की दृष्टि से बड़ा मास्टरस्ट्रोक माना जा रहा है. चुनाव आयोग के आंकड़े बताते हैं कि दिल्ली के कुल 1.43 करोड़ मतदाताओं में 64 लाख से ज्यादा महिलाएं हैं. ऐसे में अगर केजरीवाल सरकार का यह फैसला लागू हो जाता है तो इसका व्यापक असर देखने को मिल सकता है.
पूजा शाली