दिल्ली में पानी वाला नारा- हर हाथ बाल्टी, हर हाथ पाइप

सुबह होते ही सड़क रसोई में बदल जाती है. सारे बर्तन बाहर और इंतजार होता हैं पानी के दूत जलदूत का, जो आए और खाली बर्तनों में जीवन भर जाए. क्योंकि कहते हैं ना जल ही जीवन है.

Advertisement
राजधानी में भारी जल समस्या राजधानी में भारी जल समस्या

लव रघुवंशी / प्रमिला दीक्षित

  • नई दिल्ली,
  • 07 जून 2016,
  • अपडेटेड 6:25 PM IST

पॉलिटिकल पार्टियां भले ही अपने नारे बदलती रहें लेकिन गर्मी में दिल्ली कुछ इलाकों का एक ही नारा हैं 'हर हाथ बाल्टी हर हाथ पाइप'. चौकिंए नहीं, यही नारा है जिसे राजधानी हर गर्मी में सुबह से शाम तक जीती है.

सुबह होते ही सड़क रसोई में बदल जाती है. सारे बर्तन बाहर और इंतजार होता हैं पानी के दूत जलदूत का, जो आए और खाली बर्तनों में जीवन भर जाए. क्योंकि कहते हैं ना जल ही जीवन है. पानी का टैंकर आया तो ऑक्टोपस मे तब्दील हो गया. इसकी पाइप चारों तरफ फैल गई. और फिर शुरू होती है पानी भरने की होड़.

Advertisement

पानी भरना सीखे बच्चे
संजय कॉलोनी में रहने वाली सपना नवीं क्लास में पढ़ती हैं पढ़ाई में नहीं लेकिन पानी की लड़ाई मे अव्वल हैं. वो बताती हैं कि अभ्यास करते-करते इसे मालूम चल गया हैं कि कहां पोजिशन लेनी हैं, और कैसे सबको धता बताते हुए अपने बर्तनों को पानी खत्म होने से पहले जलमग्न कर लेना है.

पानी के लिए होती हैं लड़ाइयां
गोविंद पुरी की संजय कॉलोनी में पानी की जरूरत बस इन टैंकरों से पूरी होती है या यूं कहिए दिल्ली के एक बहुत बड़े हिस्से की यही हालत हैं. पानी की किल्लत ऐसी की मामूली लड़ाई-झगड़े चोट तो क्या मर्डर तक हो चुके हैं पानी की इस लड़ाई में.

अर्से से नहीं बदली दशा
दिल्ली की वो अनाधिकृत कॉलोनिया जहां पानी की पाइपलाइन नहीं है वहां टैंकर के भरोसे ही जीवन कट रहा है. जहां जल बोर्ड के टैंकर नही आ पाते वहां प्राइवेट टैंकर पैसा कमाते हैं. सदर बाजार प्रियदर्शिनी बस्ती, संगम विहार, तिगड़ी कॉलोनी, बदरपुर, ओखला, मदनपुर खादर, परमानंद कॉलोनी समेत तमाम कॉलोनी हैं, जहां अर्से से दशा नहीं बदली. अनुमान के मुताबिक दिल्ली को रोजाना 1200 एमजीडी यानी मिलियन गैलेन पानी की दरकार होती हैं, जबकि महज 960 एमजीडी ही मिल पाता हैं.

Advertisement

हरियाणा के भरोसे लातूर पानी भेजने को तैयार दिल्ली सरकार को ये कॉलोनिया रोज याद करती हैं. हर गर्मी का ये ही हाल है. पार्षद-विधायक बदलते रहते हैं, लेकिन दिल्ली के इन इलाकों की दशा नहीं बदलती.

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement