वन भूमि पर अतिक्रमण करके मंदिर बनाने पर दिल्ली हाई कोर्ट ने एक बहुत ही महत्वपूर्ण फैसला दिया है. हाई कोर्ट ने कहा है कि वन भूमि पर अतिक्रमण कर मंदिर निर्माण को जायज नहीं ठहराया जा सकता है. इस तरह के मामलों में कोर्ट अधिकारियों को यह निर्देश नहीं दे सकता कि मंदिर को नहीं गिराया जाना चाहिए.
दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा है कि वन भूमि पर अतिक्रमण का बचाव नहीं किया जा सकता. अदालत ने राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में एक वन भूमि पर बने पांच दशक पुराने मंदिर को नहीं गिराने का प्राधिकारियों को निर्देश देने से इनकार कर दिया.
अदालत ने कहा कि याचिका में किए गए उल्लेख से स्पष्ट है कि मंदिर का निर्माण अतिक्रमण करके किया गया था और वन विभाग को जमीन वापस लेने या ढांचे को गिराने से रोकने का कोई कारण नहीं है. अदालत ने कहा, 'यह दलील भी याचिका में उल्लेखित बात से मेल नहीं खाती कि ढांचा एक प्राचीन मंदिर है क्योंकि उसमें कहा गया है कि उसका निर्माण 1965 में हुआ था.'
जस्टिस विभू बाखरू ने मंदिर 'बाबा मोहन राम की खोली प्राचीन मंदिर' का प्रबंधन करने वाले की ओर से दायर याचिका खारिज करते हुए कहा, 'इसके मद्देनजर इस अदालत को वन विभाग को जमीन वापस लेने या वहां किसी ढांचे को गिराने से रोकने का कोई कारण नहीं दिखता. यह अब स्थापित है कि वन भूमि पर किसी भी अतिक्रमण का संरक्षण नहीं किया जाएगा.' याचिकाकर्ता ने दावा किया कि मंदिर का निर्माण उसके पिता ने 1965 में किया था और वह और उसके बच्चे उसकी देख-रेख कर रहे हैं.
वरुण शैलेश