ओडिशा हाईकोर्ट के CJ की अपील, वकील 'माई लॉर्ड', 'योर लॉर्डशिप', 'योर ऑनर' या 'ऑनरेबल' जैसे शब्दों से बचें

अगस्त, 2020 में CJI के कोर्ट में एक बातचीत, जब एक वकील ने 'योर ऑनर' शब्द का इस्तेमाल किया, तब CJI बोबडे ने उन्हें नसीहत दी थी, "क्या आप यूनाइटेड स्टेट्स सुप्रीम कोर्ट के सामने पेश हो रहे हैं? 'योर ऑनर' का इस्तेमाल अमेरिका में होता है न कि भारतीय सुप्रीम कोर्ट में.

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ओडिशा हाई कोर्ट. -फाइल फोटो ओडिशा हाई कोर्ट. -फाइल फोटो

मोहम्मद सूफ़ियान

  • भुवनेश्वर,
  • 04 जनवरी 2022,
  • अपडेटेड 5:09 PM IST
  • 2020 में ही कलकत्ता HC के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश ने सर कहने की अपील की थी
  • 2020 में CJI बोबडे ने भी वकील को दी थी नसीहत

ओडिशा हाई कोर्ट में योर ऑनर, माई लॉर्ड और ऑनरेबल जैसे संबोधित किए जाने वाले शब्द अतीत बन जाएंगे. दरअसल, हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस एस. मुरलीधर ने सोमवार को वकीलों से इन शब्दों का उपयोग न करने को कहा.

हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस एस. मुरलीधर और आरके पटनायक ने वकीलों से अपील करते हुए कहा कि नए साल 2022 के पहले कार्यदिवस यानी सोमवार से इसे फंक्शन में लाया जाए. डबल बेंच की ओर से वकीलों से अपील की गई है कि पीठासीन न्यायाधीशों को 'माई लॉर्ड', 'योर लॉर्डशिप', 'योर ऑनर' या 'ऑनरेबल' जैसे शब्दों से संबोधित करने से बचें. 

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चीफ जस्टिस एस मुरलीधर और न्यायमूर्ति आरके पटनायक की ओर से कहा गया कि 'माई लॉर्ड', 'योर लॉर्डशिप', और 'योर ऑनर' या 'माननीय' की जगह सर या कोई अन्य मार्यादा के शब्द पर्याप्त हैं. हालांकि, इसे एक आदेश या एक निर्देश के रूप में नहीं देखा जा सकता है क्योंकि ऐसा कोई नियम न तो सचिवालय ने बनाया है और न ही हाई कोर्ट ने. न ही किसी याचिका पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट का फैसला है. यह देखा जाना बाकी है कि क्या अन्य बेंच और अदालतें इस कदम का स्वागत और पालन करेंगी?

6 मई 2006 को, बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने भारत के राजपत्र में एक प्रस्ताव प्रकाशित किया था, "न्यायालय के प्रति सम्मानजनक रवैया प्रदर्शित करने के बार के दायित्व के साथ और न्यायिक कार्यालय की गरिमा को ध्यान में रखते हुए, सर्वोच्च न्यायालय, उच्च न्यायालयों या अधीनस्थ न्यायालयों में अपनाए जाने वाले संबोधन का रूप इस प्रकार होना चाहिए: "सर्वोच्च न्यायालयों और उच्च न्यायालयों "योर ऑनर" "या" "ऑनरेबल कोर्ट" और और अधीनस्थ न्यायालयों और न्यायाधिकरणों में "यह वकीलों पर है कि वो कोर्ट को "सर" या संबंधित क्षेत्रीय भाषाओं में समकक्ष शब्द से संबोधित करें.

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एक स्पष्टीकरण भी दिया गया था- "माई लॉर्ड" और "योर लॉर्डशिप" अतीत की बातें हैं. न्यायालय के प्रति सम्मानजनक रवैया दिखाते हुए उपरोक्त नियम को शामिल करने का प्रस्ताव है.

अगस्त, 2020 में CJI के कोर्ट में जब एक वकील ने 'योर ऑनर' शब्द का इस्तेमाल किया, तब CJI बोबडे ने उन्हें नसीहत दी थी, "क्या आप यूनाइटेड स्टेट्स सुप्रीम कोर्ट के सामने पेश हो रहे हैं? 'योर ऑनर' का इस्तेमाल अमेरिका में होता है न कि भारतीय सुप्रीम कोर्ट में.

2020 में ही कलकत्ता हाईकोर्ट के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति थोट्टाथिल बी. नायर राधाकृष्णन ने पश्चिम बंगाल और अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के सभी न्यायिक अधिकारियों से उन्हें 'माई लॉर्ड' या 'लॉर्डशिप' के बजाय 'सर' के रूप में संबोधित करने की अपील की थी. 

 

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