दिल्ली: साप्ताहिक बाजार में नहीं हो रहा था सोशल डिस्टेंसिंग का पालन, बंद हुई मार्केट

एनडीएमसी के मुताबिक, बवाना के जेजे कालोनी स्थित मार्केट को नरेला जोन की सिविक बॉडी ने खोलने की इजाजत दी थी. सोमवार को पुष्प विहार, नजफगढ़, शिव नगर, निजामुद्दीन, मल्का गंज, रंजीत नगर, घंटा घर, मंगोलपुरी, शास्त्री नगर समेत अन्य मार्केट खोली गईं.

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पूर्वी दिल्ली की गांधी नगर मार्केट (फोटो- पीटीआई) पूर्वी दिल्ली की गांधी नगर मार्केट (फोटो- पीटीआई)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 26 अगस्त 2020,
  • अपडेटेड 11:30 AM IST
  • सोशल डिस्टेंसिंग नियमों का पालना करना अनिवार्य
  • प्रशासन ने इस साप्ताहिक बाजार को बंद करवा दिया
  • मार्केट में नियमों का पालन नहीं किया जा रहा था

देश में कोरोना के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं. इस बीच दिल्ली में साप्ताहिक बाजार लगाने पर भी छूट दे दी गई है, लेकिन उसमें सोशल डिस्टेंसिंग नियमों का पालना करना अनिवार्य होगा. नॉर्थ दिल्ली के नरेला इलाके के साप्ताहिक बाजार में मंगलवार को सोशल डिस्टेंसिंग नियमों का उल्लंघन होता देखा गया. इसके बाद प्रशासन ने इस साप्ताहिक बाजार को बंद करवा दिया. 

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न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, अधिकारियों ने बताया कि पांच महीने बाद दिल्ली में साप्ताहिक बाजार खोलने की अनुमति दी गई है. जिसमें दुकान मालिकों का मास्क पहनना अनिवार्य है, दुकानों के बीच में दूरी, सैनिटाइजर का होना जरूरी है. ऐसे में इन सभी नियमों का पालन नहीं किया जा रहा था, जिसके बाद बाजार को बंद करने का फैसला किया गया.

सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों का हो रहा है उल्लंघन

एनडीएमसी के मुताबिक, बवाना के जेजे कालोनी स्थित मार्केट को नरेला जोन की सिविक बॉडी ने पुन: खोलने की इजाजत दी थी. सोमवार को पुष्प विहार, नजफगढ़, शिव नगर, निजामुद्दीन, मल्का गंज, रंजीत नगर, घंटा घर, मंगोलपुरी, शास्त्री नगर समेत अन्य मार्केट खोली गईं. अथॉरिटी ने 30 अगस्त तक साप्ताहिक बाजार ट्रायल बेसिस पर खोलने की इजाजत दी है. पुष्प विहार साप्ताहिक बाजार के जनरल सेक्रेटरी राजकुमार कटारिया ने कहा, 'रेहड़ी-पटरी वालों को कहा गया है कि भीड़ इकट्ठा न होने दें और सोशल डिस्टेंसिंग का पूरा पालन करें. उन्हें मार्क और सैनिटाइजर रखने का भी निर्देश दिया गया है.

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इसके अलावा, एनडीएमसी के अधिकारियों ने बताया कि मंगोलपुरी में एक बिल्डिंग सुरक्षा नियमों के अनुसार खतरनाक मानी गई, जिसे बाद में अधिकारियों ने उसे ध्वस्त कर दिया. जगह के मालिक को लिखित में कहा गया था कि वे इसे खुद ही छह दिनों में गिरा दें. उन्होंने ऐसा नहीं किया, इसलिए सिविक अथॉरिटी को ऐसा करना पड़ा.

 

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