नोटबंदी के दौर में लोग मोबाइल ऐप के जरिए पता लगाने की कोशिश करते देखे गए हैं कि उनके इलाके में किस एटीएम में कैश मिल रहा है. अब एक ऐसा ऐप भी आ गया है जो आपको प्रेशर महसूस होने पर बताएगा कि नजदीक में कहां टॉयलेट (लू) हैं जहां जाकर आप हल्के हो सकते हैं. इस समस्या का समाधान सरकार और गूगल का नया साझा एप्लिकेशन सुझाएगा.
घर से बाहर होने पर अनजान जगह पर टॉयलेट ढूंढने में परेशानी होती है. ऐसे में प्रेशर महसूस होने हालत खराब हो जाती है. पहले तो टॉयलेट मिलने में ही देर होती है. मिल भी गया तो वहां गंदगी देखकर अंदर ही नहीं जाया जा सकता.
केंद्रीय शहरी विकास मंत्री एम वेंकैया नायडू ने मोबाइल पर एक क्लिक से टॉयलेट ढूंढने में मदद करने वाला ऐप लांच किया है. इस ऐप में डेढ़ लाख से ज्यादा टॉयलेट्स की जानकारी है. इस ऐप पर जाकर अंग्रेजी में 'Toilet' या 'lavatory' टाइप करना होगा. हिंदी वाले ऐप में इस पर 'स्वच्छ' या 'सुलभ' टाइप करना होगा. फिर तत्काल मैप पर आपके आसपास के सारे टॉयलेट्स की लोकेशन ब्लिंक करती नजर आएंगी.
ऐप ये बताने में भी मददगार है कि किस टॉयलेट में साफ-सफाई का कैसा स्तर है और वहां क्या क्या सुविधाएं उपलब्ध हैं. ये भी पता चल जाएगा कि टॉयलेट का इस्तेमाल निशुल्क है या उसके लिए जेब से कुछ देना होगा. साथ ही ऐप ये भी बताएगा कि टॉयलेट में दिव्यांगों के लिए विशेष प्रबंध है या नहीं.
टॉयलेट के इस्तेमाल के बाद आप चाहें तो उसे रेटिंग भी दे सकते हैं. सुविधा और रखरखाव के मुताबिक आप शून्य से 5 सितारा तक रेटिंग कर सकते हैं. शहरी विकास मंत्रालय के सचिव राजीव गाबा ने बताया कि ऐप के जरिये आसपास मौजूद रेस्टोरेंट्स, बैंक, पब्लिक सेक्टर के दफ्तर, अस्पताल, मॉल्स, पेट्रोल पंप, गैस स्टेशन वगैरह पर मौजूद टॉयलेट की जानकारी पलक झपकते ही मिल जाएगी.
इस ऐप में जिन टॉयलेट्स को लिस्ट नहीं किया जा सका है, अगर यूजर्स को उनका पता है तो वो इसमें उन्हें जुड़वा सकते हैं. जो टॉयलेट बंद पड़े हैं उनकी जानकारी भी ऐप में जोड़ी जा सकती है.
मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक पंजाब काडर के आईएएस अफसर विपुल उज्ज्वल ने साल भर पहले इस परियोजना से मिलने वाली सहूलियत के बारे में सरकार को बताया था. तब से ही इस पर काम चल रहा था. फिर इस बारे में गूगल से बात हुई और बात बन गई.
स्वच्छ भारत अभियान में हाथ बंटा रहे NGO 'सुलभ इंटरनेशनल' ने अपनी टॉयलेट चेन में पेटीएम जैसी सुविधा देकर इस क्षेत्र को भी डिजिटल बना दिया है. अब ये बात दूसरी है कि दूर दराज के इलाकों में इंटरनेट नेटवर्क किस तरह काम करता है.
संजय शर्मा / खुशदीप सहगल