मौजूदा दौर में सोशल मीडिया का दखल हर क्षेत्र में बढ़ा है. पत्रकारिता से भी इससे अछूती नहीं है. यही कारण है कि एक नई तरह की पत्रकारिता 'हैशटैग जनर्लिज्म' की शुरुआत भी हो गई है. बीते दिनों पत्रकारिता की इसी नई विधा पर चर्चा करते हुए 'आज तक' के एडिटर और न्यूज एंकर सईद अंसारी ने कहा कि करीब तीन करोड़ ट्विटर यूजर्स सवा सौ करोड़ की आबादी की अावाज नहीं बन सकते.
भारत में आधुनिक टेलीविजन पत्रकारिता के जनक और 'आज तक' के संस्थापक संपादक स्वर्गीय सुरेन्द्र प्रताप सिंह (एसपी सिंह) की याद में दिल्ली के इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में 26 जून को 'मीडिया खबर कॉन्क्लेव' और एसपी सिंह स्मृति व्याख्यान का आयोजन किया गया. इस दौरान हैशटैग की पत्रकारिता और खबरों की बदलती दुनिया पर परिचर्चा का आयोजन भी किया गया.
'कभी किसी व्यक्ति का स्टेटस ट्रेंड क्यों नहीं करता?'
कार्यक्रम में बोलते हुए सईद अंसारी ने कहा, 'क्या ट्विटर के स्टेटस किसी भी व्यक्ति के विचार को व्यक्त करने के लिए पर्याप्त है? क्या तीन करोड़ ट्विटर अकाउंटधारी सवा सौ करोड़ की आबादी की आवाज बन पा रहे हैं? यदि आवाज हैं तो किसी व्यक्ति का स्टेटस क्यों ट्रेंड नहीं करता. दरअसल ये बहुत ही एलीट, सेलिब्रिटी का माध्यम है. हालांकि हम इसकी जरूरत को नकार नहीं सकते.'
'ये मीडियम इतना भी मासूम नहीं'
उन्होंने आगे कहा, 'बुलेटिन के बीच में हमें भी कई बार किसी के ट्वीट को शामिल करना होता है और खबरें वहां से दूसरी दिशा में मुड़ती हैं. ट्विटर पर जो ट्रेंड हो रहा है वो मेनस्ट्रीम मीडिया में बतौर खबर शामिल किया जा रहा है, लेकिन कभी आपने देखा है कि किसी सामान्य व्यक्ति की कोई खबर ट्रेंड कर रही हो? आप लाख तर्क देते रहिए कि इससे लोकतंत्र की जड़ें मजबूत हो रही है, लेकिन क्या ये सचमुच इतना मासूम माध्यम है?'
'सचेत होकर करना होगा इस्तेमाल'
इस मौके पर वरिष्ठ पत्रकार राहुल देव ने सोशल मीडिया के संदर्भ में कहा कि हैशटैग की बड़ी दिक्कत ये है कि यह व्यक्ति की वस्तुनिष्ठता को प्रतिबिंबित नहीं करता. लेकिन यदि सचेत होकर सोशल मीडिया का इस्तेमाल किया जाए तो ये उपयोगी सिद्ध होगा.
वरिष्ठ पत्रकार सतीश के सिंह ने कार्यक्रम में अपनी राय रखते हुए कहा कि आजकल सोशल मीडिया के बहाने पत्रकार ही पीआर कर रहा है. पीआर कंपनियों के लिए कुछ बचा नहीं. ये बहुत ही खतरनाक स्थिति है.
लव रघुवंशी