जमीन के बदले नौकरी के मामले में दिल्ली की एक विशेष अदालत ने शुक्रवार को पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव और अन्य के खिलाफ दाखिल चार्जशीट पर संज्ञान लेने के आदेश को 25 फरवरी तक के लिए सुरक्षित रख लिया है. स्पेशल जज विशाल गोगने को शुक्रवार को इस पर फैसला सुनाना था, लेकिन सीबीआई की ओर से कुछ बिंदुओं पर स्पष्टीकरण देने के बाद उन्होंने सुनवाई टाल दी.
न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक सीबीआई ने अदालत को बताया कि इस मामले में तीन अलग-अलग चार्जशीट दाखिल की गई हैं, लेकिन सभी में एक ही मूल षड्यंत्र को उजागर किया गया है और इनमें कई सामान्य आरोपी और गवाह हैं. ऐसे में पूरे मामले की केवल एक ही मुकदमे के रूप में सुनवाई की जानी चाहिए.
अदालत ने इस पर सीबीआई की दलील को दर्ज करते हुए मामले की अगली सुनवाई 25 फरवरी को तय की, जिसमें चार्जशीट पर संज्ञान लेने और आगे की कार्यवाही पर निर्णय होगा. सीबीआई ने अदालत को यह भी बताया कि उन्हें लोक सेवक आर. के. महाजन के खिलाफ अभियोजन चलाने के लिए संबंधित अधिकारियों से आवश्यक स्वीकृति मिल गई है. इससे पहले 16 जनवरी को अदालत ने कहा था कि यदि 30 जनवरी तक महाजन के खिलाफ स्वीकृति नहीं मिलती है, तो सक्षम अधिकारी को इसका स्पष्टीकरण प्रस्तुत करना होगा.
क्या है 'जमीन के बदले नौकरी' घोटाला?
यह मामला पश्चिम-मध्य रेलवे के जबलपुर जोन में साल 2004 से 2009 के बीच ग्रुप-डी पदों पर हुई नियुक्तियों से जुड़ा है. आरोप है कि लालू प्रसाद यादव के रेल मंत्री रहने के दौरान उम्मीदवारों से उनके परिवार या सहयोगियों के नाम पर जमीन हस्तांतरित करवाई गई थी और इसके बदले में उन्हें रेलवे में नौकरियां दी गईं.
सीबीआई ने 18 मई 2022 को लालू प्रसाद यादव, उनकी पत्नी, दो बेटियों, अज्ञात सरकारी अधिकारियों और कुछ निजी व्यक्तियों के खिलाफ मामला दर्ज किया था. इस मामले में अब तक 30 आरोपियों के खिलाफ अभियोजन की स्वीकृति मिल चुकी है.
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