नए साल के जश्न पर पहरे से होटल-रेस्त्रां मालिक मायूस, कोरोना व लॉकडाउन से इंडस्ट्री को 15 लाख करोड़ की चोट

रेस्त्रां सेक्टर देश में सबसे बुरी तरह प्रभावित सेक्टरों में से एक रहा है. महामारी और उसकी वजह से लॉकडाउन ने इंडस्ट्री को 15 लाख करोड़ रुपये तक की चोट पहुंचाई है. उसे करीब तीन तिमाहियों के इकोनॉमिक वॉशआउट का सामना करना पड़ा है. 

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कोरोना-लॉकडाउन से होटल-रेस्त्रां मालिक मायूस (फोटो- पीटीआई) कोरोना-लॉकडाउन से होटल-रेस्त्रां मालिक मायूस (फोटो- पीटीआई)

ऐश्वर्या पालीवाल

  • नई दिल्ली ,
  • 30 दिसंबर 2020,
  • अपडेटेड 6:57 PM IST
  • रेस्त्रां सेक्टर देश में सबसे बुरी तरह प्रभावित सेक्टरों में से एक
  • नए साल के जश्न पर पहरे से होटल-रेस्त्रां मालिक मायूस
  • कोरोना-लॉकडाउन से इंडस्ट्री को 15 लाख करोड़ की चोट

2020 जाने में कुछ ही समय बचा है. 2021 आने वाला है. नववर्ष में हर कोई नए उत्साह और नए जोश के साथ प्रवेश करना चाहता है. हालांकि, हॉस्पिटेलिटी और सर्विस सेक्टर के लिए नववर्ष कोई आनंद जैसी बात नहीं ला रहा. पंजाब, गुजरात, महाराष्ट्र, राजस्थान और हिमाचल प्रदेश जैसे कई राज्यों में नाइट कर्फ्यू और लोगों के एकत्र होने पर बंदिशों के चलते नए साल के जश्न पर ब्रेक लगा है. 

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रेस्त्रां सेक्टर देश में सबसे बुरी तरह प्रभावित सेक्टरों में से एक रहा है. महामारी और उसकी वजह से लॉकडाउन ने इंडस्ट्री को 15 लाख करोड़ रुपए तक की चोट पहुंचाई है. उसे करीब तीन तिमाहियों के इकोनॉमिक वॉशआउट का सामना करना पड़ा है. 

50 फीसदी से अधिक रेस्त्रांओं ने हमेशा के लिए अपने शटर गिरा दिए हैं. जो अब भी बिजनेस में बने हुए हैं, वो 2021 को अपने अस्तित्व की लड़ाई के तौर पर देख रहे हैं. 

2021 को आप कैसे देख रहे हैं?, इस सवाल के जवाब में ओलिव ग्रुप ऑफ रेस्टोरेंट्स के एडी सिंह ने कहा, “पूरा होटल उद्योग लॉकडाउन खत्म होने का इंतजार कर रहा था. सरकार की ओर से लगाया कर्फ्यू कड़ी बंदिशों वाला है. लॉकडाउन से बिजनेस पर भारी मार पड़ी है. जश्न पिछले साल जैसा नहीं होगा. लेकिन हम उम्मीद कर रहे हैं कि नववर्ष पूरी तरह डिजास्टर भी न हो.” सिंह विश्वास जताते हैं कि अगले साल चीजें सुधरेंगी और इंडस्ट्री के सुनहरे दिन फिर लौटेंगे. 

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नए साल के जश्न पर पाबंदियां

ओवरऑल ट्रेंड्स की बात की जाए तो वो उम्मीद जगाने वाले हैं. कोविड-19 की दस्तक के पहले के दिनों से तुलना की जाए तो 40 से 50 फीसदी लोग ही बाहर आ रहे हैं. 

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ट्रेडर्स एसोसिएशन, कनॉट प्लेस के अध्यक्ष अतुल भार्गव कहते हैं, “नया साल रेस्त्रांओं के लिए अच्छी कमाई का मौका होता है, उन्हें कोविड-19 से खासा नुकसान हुआ, अब ये बंदिशें चोट पहुंचा रही हैं. सरकार को बंदिशों के एलान से पहले इंडस्ट्री के बारे सोचना चाहिए था. जो सुरक्षा प्रोटोकॉल की अनदेखी करते हैं, उन्हें दंडित किया जाना चाहिए. लेकिन हर किसी को इससे नुकसान नहीं होने दिया जाना चाहिए.” 

मुंबई के हरेज्जो रेस्टोरेंट के किंजल मेहता ने कहा, हमारे रेस्टोरेंट में 200 लोगों के बैठने की क्षमता है. पिछले हफ्ते तक हमारी पूरी क्षमता का इस्तेमाल हो रहा था. लेकिन जैसे ही नाइट कर्फ्यू का ऐलान हुआ, ग्राहकों ने आना बंद कर दिया. ग्राहक हमसे फोन पर पूछ रहे हैं कि हमारे गेस्ट्स कैसे 11 बजे तक घर लौट सकते है, इसलिए वो अपनी बुकिंग्स को होल्ड पर रख रहे हैं. हमने अपने स्टाफ को पीक सीजन की संभावना को देखते हुए फ्लाइट्स से बुलाया. अगर लोग कोविड-19 की घबराहट वाले दौर में फिर पहुंचते हैं तो बिजनेस को आने वाले महीनों में और नुकसान का सामना करना पड़ेगा. 

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