AAP विधायक प्रकाश जारवाल का रद्द हो निर्वाचन, चुनाव आयोग ने दिल्ली HC में दाखिल किया हलफनामा

दिल्ली हाईकोर्ट में दाखिल इलेक्शन पिटिशन पर चुनाव आयोग ने अपना हलफनामा दाखिल कर दिया है. चुनाव आयोग ने इस हलफनामे में कहा है कि दिल्ली में बैरवा जाति ओबीसी में आती है, जबकि देवली की सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है जहां से प्रकाश जारवाल ने चुनाव जीता था.

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आम आदमी पार्टी के विधायक प्रकाश जारवाल (फाइल फोटो) आम आदमी पार्टी के विधायक प्रकाश जारवाल (फाइल फोटो)

पूनम शर्मा

  • नई दिल्ली,
  • 28 जनवरी 2021,
  • अपडेटेड 12:41 AM IST
  • दिल्ली में ओबीसी के तहत आती है बैरवा जाति- निर्वाचन आयोग
  • राजस्थान से ताल्लुक रखते हैं जारवाल, वहां बैरवा है अनुसूचित

आम आदमी पार्टी के विधायक प्रकाश जारवाल का निर्वाचन रद्द करने को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट में दाखिल इलेक्शन पिटिशन पर चुनाव आयोग ने अपना हलफनामा दाखिल कर दिया है. चुनाव आयोग ने इस हलफनामे में कहा है कि दिल्ली में बैरवा जाति ओबीसी में आती है, जबकि देवली की सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है जहां से प्रकाश जारवाल ने चुनाव जीता था.

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चुनाव आयोग ने अपने हलफनामे में यह भी कहा है कि सुप्रीम कोर्ट के एक पुराने जजमेंट के मुताबिक किसी राज्य में अगर कोई ओबीसी से है तो दूसरे राज्य में उसे अनुसूचित जाति का लाभ नहीं मिल सकता है. गौरतलब है कि प्रकाश जारवाल राजस्थान से ताल्लुक रखते हैं और जिस बैरवा जाति से वे ताल्लुक रखते हैं, वह राजस्थान में अनुसूचित जाति के तहत आती है लेकिन दिल्ली में ओबीसी की लिस्ट में शामिल है. इसी आधार पर प्रकाश जारवाल का निर्वाचन रद्द करने की मांग को लेकर हाईकोर्ट में चुनाव याचिका दाखिल की गई है.

दिल्ली हाईकोर्ट में प्रकाश जारवाल का निर्वाचन रद्द करने के लिए दो याचिकाएं दाखिल की गई हैं. दोनों ही याचिकाएं उनके खिलाफ देवली से चुनाव लड़ने वाले दो उम्मीदवारों की तरफ से दाखिल की गई हैं. इसमें बीजेपी के उम्मीदवार रहे अरविंद कुमार और डालचंद कपिल शामिल हैं. याचिका में कहा गया है कि प्रकाश जारवाल बैरवा जाति से हैं लेकिन दिल्ली की लिस्ट में बैरवा जाति अनुसूचित जाति की लिस्ट में शामिल नहीं हैं. यह ओबीसी की कैटेगरी में आती है लेकिन उसके बावजूद प्रकाश जारवाल ने अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित सीट पर चुनाव लड़ा.

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याचिकाकर्ता डालचंद कपिल का कहना है कि जिस समय प्रकाश जारवाल ने अपना नामांकन पत्र भरा था, उस वक्त भी उन्होंने इसकी शिकायत चुनाव आयोग से की थी लेकिन चुनाव आयोग में प्रकाश जारवाल को चुनाव लड़ने से नहीं रोका. इसके बाद उन्होंने मार्च में दिल्ली हाई कोर्ट का रुख किया था लेकिन करोना के चलते इस मामले में कोर्ट में सुनवाई नहीं हो पाई. दिल्ली हाईकोर्ट ने इस मामले में अगली सुनवाई के लिए 1 फरवरी की तारीख तय की है.

याचिकाकर्ता की तरफ से कोर्ट में पेश हुए वकील महमूद प्राचा का कहना है कि इस याचिका के माध्यम से कोर्ट में एक तकनीकी और कानूनी सवाल उठाया गया है कि क्या किसी रिजर्व सीट पर एक ऐसा उम्मीदवार चुनाव लड़ सकता है जो अनुसूचित जाति से नहीं है. महमूद प्राचा ने बताया कि रिप्रेजेंटेशन आफ पीपल्स एक्ट की धारा 5 के मुताबिक ऐसा किया जाना गैरकानूनी है. लिहाजा चुनाव लड़ने के दौरान प्रकाश जारवाल को अनुचित लाभ मिला.

देवली से विधायक प्रकाश जारवाल ने दिल्ली के विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र नंबर- 47 से अपना पर्चा भरा था. दिल्ली की इस सीट पर वे पहले भी चुनाव जीते थे. याचिकाकर्ता का कहना है कि क्या अनुसूचित जाति का नहीं होने के बावजूद धोखाधड़ी से न सिर्फ विधानसभा चुनाव लड़ा, बल्कि अनुसूचित जाति के एक व्यक्ति की सीट को भी हड़प लिया. याचिकाकर्ता की ओर से मांग की गई है कि कोर्ट विधायक प्रकाश जारवाल का निर्वाचन रद्द करने का आदेश दे.

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