दिल्ली हाई कोर्ट ने दिल्ली फ्लाइंग क्लब (डीएफसी) की उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें क्लब ने सफदरजंग एयरपोर्ट से निकाले जाने के मामले को चुनौती दी थी. कोर्ट ने कहा कि इस जगह को एयरोनॉटिकल एक्टिविटी की बजाय शादी की पार्टियों के लिए जानने लग गए थे.
कोर्ट मे एरो क्लब ऑफ इंडिया प्रा.लि. (एसीआईपीएल) व डीएफसी ने एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एएआई) के आदेश को चुनौती दी थी. एएआई ने इनको लाइसेंस फीस देने का निर्देश देते हुए कारण बताओ नोटिस भी जारी किया था. क्लब ने 8.3 करोड़ रुपये की लाइसेंस फीस नहीं दी है.
कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि क्लब के पास कोई शेयर कैपिटल नहीं है. ऐसे में एएआई के पास उनसे लाइसेंस फीस वसूलने का भी कोई तरीका नहीं है. कोर्ट ने कहा कि बढ़ी हुई लाइसेंस फीस के मामले को तभी स्वीकार किया जा सकता है, जब पुराना बकाया दिया जाए. कोर्ट ने साफ किया की याचिकाकर्ता के साथ कोई अन्याय नहीं हुआ है.
कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि अगर इस क्लब में ट्रेनिंग देने का काम किया जाता है, तो उनको इस तरह की इतनी महंगी जगह की कोई जरूरत नहीं है. जज ने यहां तक कह दिया कि बतौर दिल्ली निवासी इतना कह सकता हूं कि पिछले कम से कम दस साल से इस जगह को शादी समारोह या पार्टी स्थल के तौर पर जाना जाता है, बजाय के एयरोनॉटिकल एक्टिविटी के.
डीएफसी व एसीआईपीएल ने इस मामले में 2007 से बढ़ाई गई लाइसेंस फीस के मामले को भी चुनौती दी थी.
लव रघुवंशी / पूनम शर्मा