हरियाणा की खट्टर सरकार ने कम पानी देने के दिल्ली जल बोर्ड के आरोप को हाईकोर्ट में खारिज किया है. हरियाणा सरकार ने कोर्ट में कहा है कि तय आपूर्ति के हिसाब से दिल्ली को पूरा पानी दिया जा रहा है. अगर किसी खास मौके पर और पानी की जरुरत है तो राज्य सरकार वो भी देने को तैयार है. इसके आलावा हरियाणा ने कहा कि मेड़ इसलिए बनाई गई थी जिससे प्रदूषित पानी को दिल्ली में जाने से रोका जा सके, लेकिन अगर जल बोर्ड को उससे एतराज है तो हम उसे हटाने को तैयार हैं. हरियाणा ने कहा है कि प्रदूषित पानी की पूरी जिम्मेदारी हरियाणा पर नहीं डाली जा सकती.
दअरसल दिल्ली जल बोर्ड ने पिछले हफ्ते हाईकोर्ट में अर्जी लगाई थी कि हरियाणा ने उनकी जल आपूर्ति 30 फीसदी घटा दी है. जिससे एनडीएमसी समेत दिल्ली के कई इलाकों में सर्दी के मौसम में भी पानी की किल्लत हो गई. हाइकोर्ट ने कहा कि हम स्थिति पर नजर बनाए हुए है, कोर्ट ने जल बोर्ड को हरियाणा के हलफनामे पर जवाब देने के लिए दो हफ्ते का वक्त दिया है और कहा है कि 13 मार्च को हाईकोर्ट इस मामले में दोबारा सुनवाई करेगा. इससे पहले पिछले हफ्ते हरियाणा से दिल्ली को मिलने वाले पानी को लेकर हो रही कटौती पर दिल्ली हाइकोर्ट ने हरियाणा सरकार को फटकार लगाई थी.
अब दिल्ली हाई कोर्ट में 13 मार्च से पहले दिल्ली जल बोर्ड को अपना पक्ष रिजॉइंडर की शक्ल में हाइकोर्ट में रखना होगा. क्योंकि फिलहाल हरियाणा सरकार ने अपने हलफनामे में दिल्ली की आपूर्ति घटाने से जुड़े जल बोर्ड के आरोप से पल्ला झाड़ लिया है.
जल बोर्ड का आरोप था कि मुनक नहर से दिल्ली आने वाले पानी को जगह-जगह रोक कर दिल्ली की सप्लाई को कम किया जा रहा है, जगह-जगह मेड़ बनाकर पानी रोका जा रहा है. और इसी का नतीजा है कि एनडीएमसी और सेंट्रल दिल्ली के इलाके पिछले 2 हफ्ते से पानी की किल्लत का सामना करने को मजबूर है. हालांकि ये पहली बार नहीं है कि दिल्ली और हरियाणा के बीच पानी के बंटवारे को लेकर आरोप प्रत्यारोप लगे हों. लेकिन इस बार समस्या को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट बेहद गंभीर है. ऐसे भी उम्मीद की जा सकती है कि दिल्ली में आने वाले वक्त में पानी की समस्या विकराल रूप नहीं लेगी.
पूनम शर्मा