दिल्ली में फर्जी CBI गैंग का भंडाफोड़: विवेक विहार पुलिस ने सुलझाया ब्लाइंड डकैती केस, ₹1.25 करोड़ कैश बरामद

दिल्ली के विवेक विहार पुलिस ने फर्जी CBI गैंग का भंडाफोड़ कर 2.5 करोड़ की डकैती का खुलासा किया है. आरोपियों ने खुद को सीबीआई अधिकारी बताकर नकदी लूटी थी. पुलिस ने NGO 'क्राइम ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन' की सचिव पापोरी बरुआ, डायरेक्टर राम सिंह मीणा और आरोपी दीपक को गिरफ्तार कर ₹1.25 करोड़ कैश बरामद किया. बाकी आरोपियों और रकम की तलाश जारी है.

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2.5 करोड़ की डकैती का खुलासा.(Photo: Arvind Ojha/ITG) 2.5 करोड़ की डकैती का खुलासा.(Photo: Arvind Ojha/ITG)

अरविंद ओझा

  • नई दिल्ली,
  • 22 अगस्त 2025,
  • अपडेटेड 5:56 PM IST

दिल्ली पुलिस की विवेक विहार थाना टीम ने एक सनसनीखेज डकैती मामले का खुलासा करते हुए फर्जी CBI गैंग का पर्दाफाश किया है. यह गैंग खुद को सीबीआई अधिकारी बताकर करोड़ों की लूटपाट कर रहा था. पुलिस ने इस गिरोह के तीन सदस्यों को गिरफ्तार किया है और ₹1.25 करोड़ नकद बरामद किया है. गिरफ्तार आरोपियों में NGO 'क्राइम ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन' की डायरेक्टर, सचिव और एक अन्य सहयोगी शामिल हैं.

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शिकायत और वारदात

दरअसल, 20 अगस्त 2025 को विवेक विहार थाने में गाजियाबाद के इंदिरापुरम निवासी मनप्रीत सिंह ने शिकायत दर्ज कराई थी. शिकायत के अनुसार, वह फाइनेंस, प्रॉपर्टी डीलिंग और कंस्ट्रक्शन के काम से जुड़े हैं. इसके लिए उन्होंने विवेक विहार के बी-253, पहली मंजिल पर ऑफिस किराए पर लिया था. बीते 6-7 महीनों में उनके कारोबार से लगभग 2.5 करोड़ रुपये जमा हुए थे, जो इसी ऑफिस में रखे थे.

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19 अगस्त की रात मनप्रीत ने अपने दोस्त रवि शंकर को 1.10 करोड़ रुपये निकालकर घर लाने के लिए भेजा. रवि जैसे ही कैश लेकर बाहर निकले, एक महिला समेत चार लोगों ने खुद को सीबीआई अधिकारी बताकर उन्हें रोक लिया. आरोपियों ने वॉकी-टॉकी और फर्जी आईडी कार्ड दिखाए और धमकाते हुए नकदी वाला बैग छीन लिया. इसके बाद वे ऑफिस में घुसे और मनप्रीत के कर्मचारी दीपक महेश्वरी से मारपीट कर बची रकम भी लूट ली. आरोपी लगभग 2.5 करोड़ रुपये लेकर फरार हो गए. जाते समय उन्होंने रवि और दीपक को अपनी कार में बैठाकर अलग-अलग जगहों पर छोड़ दिया और धमकाया कि घटना की जानकारी किसी को न दें.

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जांच और सफलता

शिकायत मिलने के बाद विवेक विहार पुलिस ने जांच शुरू की. पुलिस टीम ने 100 से अधिक CCTV फुटेज खंगाले और तकनीकी निगरानी शुरू की. जांच में दोनों एर्टिगा कारों के नंबर ट्रेस किए गए, जिन्हें बाद में फरीदाबाद से ट्रैक किया गया. कार मालिकों से पूछताछ में पता चला कि गाड़ियां एक NGO को किराए पर दी गई थीं.

इसके बाद पुलिस टीम NGO 'क्राइम ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन' के दफ्तर, सईदुलाजाब (साकेत) पहुंची. वहां छापेमारी कर NGO की सचिव पापोरी बरुआ (30) और सहयोगी दीपक (32) को गिरफ्तार किया गया. उनके पास से क्रमशः ₹1.08 करोड़ और ₹17.5 लाख नकद बरामद हुआ. पूछताछ में NGO के डायरेक्टर राम सिंह मीणा (62 वर्ष) को भी गिरफ्तार किया गया.

आरोपी और गैंग का नेटवर्क और बरामदगी

पुलिस के अनुसार, पापोरी बरुआ असम की रहने वाली है और NGO की सचिव है, जबकि दीपक तुगलकाबाद, दिल्ली का निवासी है. डायरेक्टर राम सिंह मीणा गैंग का मास्टरमाइंड बताया जा रहा है. पूछताछ से खुलासा हुआ है कि इस डकैती में चार महिलाएं और 4-5 अन्य लोग शामिल थे. पुलिस अब बाकी फरार आरोपियों और लूटी गई रकम की तलाश कर रही है. पुलिस ने अब तक कुल ₹1.25 करोड़ (एक करोड़ पच्चीस लाख पचास हजार रुपये) बरामद किए हैं. केस दर्ज कर विवेक विहार पुलिस आगे की जांच में जुटी हुई है.

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