डेंगू की चपेट में दिल्ली, नगर निगम बोली- पैसे की किल्लत है

दिल्ली में बीते हफ्ते, इस साल के सर्वाधिक डेंगू के मामले सामने आए हैं. एक हफ्ते में तीस नए मामले सामने आने से लोगों में डर है.

Advertisement
प्रतीकात्मक तस्वीर प्रतीकात्मक तस्वीर

परमीता शर्मा / अंकित यादव

  • नई दिल्ली,
  • 11 सितंबर 2018,
  • अपडेटेड 7:10 PM IST

देश की राजधानी दिल्ली में एक बार फिर डेंगू का डंक दिल्लीवालों को डस रहा है. दिल्ली में बीते हफ्ते, इस साल के सर्वाधिक डेंगू के मामले सामने आए हैं. एक हफ्ते में तीस नए मामले सामने आने से लोगों में डर है. एक हफ्ते के भीतर इतने मामले सामने आने पर नगर निगम ने भी तुरंत बैठक बुलाई. माना ये जा रहा है कि इस साल देर तक मॉनसून के रहने के चलते डेंगू के मामलों में बढ़ोतरी हो सकती है.

Advertisement

ये हैं इस वर्ष मच्छरों से जुड़ी बीमारियों के आंकड़े

इस सीजन में अब तक मलेरिया के 195 मामले सामने आए हैं, तो वहीं इस साल अब तक डेंगू के 137 मामले सामने आ चुके हैं. चिकनगुनिया के भी 50 के करीब पहुंच गए हैं. वहीं महज एक हफ्ते में मामलों में रिकॉर्ड बढ़ोतरी हुई और डेंगू के 30 नए मामले सामने आए. कई आरडब्ल्यूए (रेजिडेंस वेलफेयर एसोसिएशन) पहले से ही नगर निगम को इस मामले में चिट्ठियां लिखती रही है लेकिन इसके बावजूद निगम ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया जिससे लोगों में काफी नाराजगी है.

स्थानीय प्रतिनिधियों को निगम ने किया अनसुना

दिल्ली के मॉडल टाउन इलाके की आरडब्लूए के अध्यक्ष संजय गुप्ता कहते हैं कि नगर निगम को पहले से ही चेताया था कि समय पर ब्रीडिंग रोकने के लिए सख्त कदम उठाए जाएं लेकिन अब तक नगर निगम चैन की नींद सो रहा था. संजय कहते हैं कि चूंकि मॉनसून सीजन देर तक एक्टिव है ऐसे में इस साल रिकॉर्ड तोड़ डेंगू के मामले बढ़ेंगे.

Advertisement

वहीं स्थानीय लोगों का कहना है कि दिल्ली सरकार और निगम के झगड़े में एक बार फिर आम जनता की बलि चढ़ गई हैं. स्वास्थ्य सेवाओं के लिए एमसीडी जिम्मेदार है. वहीं फंड देने का काम दिल्ली सरकार को करना है लेकिन दोनों ही झगड़े में व्यस्त हैं.

मेयर बोले- हमारे पास पैसा नहीं

मच्छरों से जुड़े मामलों की बढ़ोतरी के बावजूद निगम के पास अपना एक अलग तर्क है. निगम का कहना है कि केजरीवाल सरकार ने उसे अब तक फंड नहीं दिया है जिसकी वजह से डेंगू और मलेरिया की रोकथाम में लगने वाले कर्मचारियों को सैलरी नहीं दी जा सकी है. यानी एक बार फिर दिल्ली सरकार और एमसीडी के बीच की खींचतान में आम आदमी का नुकसान होता दिख रहा है.

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement