राजधानी दिल्ली में दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) के अस्पतालों की हालत बेकार होती जा रही है. फंड की कमी से नॉर्थ एमसीडी के सबसे बड़े अस्पतालों में शामिल हिंदू राव हॉस्पिटल की हालत काफी खराब है. अस्पताल में जरूरी दवाओं का स्टॉक खत्म हो गया है, जबकि इमरजेंसी की दवाएं अब कुछ दिनों की ही बची हैं.
दिल्ली में मॉनसून से पहले ही बीमारियों ने रफ्तार पकड़ ली है. दिल्ली में मलेरिया के मरीजों की संख्या महज एक हफ्ते में 18 से बढ़कर 31 हो गई है, तो वहीं डेंगू के 14 और चिकनगुनिया के 7 मामले इस सीजन में सामने आ चुके हैं. वहीं दूसरी ओर नगर निगम के अस्पतालों में जरूरी दवाओं की कमी हो गई है.
ब्लड टेस्ट करने की किट भी खत्म!
डॉक्टरों की मानें तो अब अस्पताल को चलाना मुश्किल हो गया है. ब्लड टेस्ट करने वाली किट भी नहीं है. हिंदू राव हॉस्पिटल की एडिश्नल एमएस विभा टंडन के मुताबिक अस्पताल में रोज़ाना 2 से 3 हजार मरीज आते हैं लेकिन फंड की कमी की वजह से इस अस्पताल को चलाना मुश्किल हो गया है. अस्पताल में नियमित सभी दवाएं खत्म हो गई हैं, जबकि इमरजेंसी दवा का स्टॉक अब केवल कुछ दिनों के लिए ही बचा है. ऐसे में जब आने वाले दिनों में मॉनसून आएगा और उसके बाद मरीज़ों की संख्या तेज़ी से बढ़ेगी तो अस्पताल को चलाना लगभग नामुमकिन हो जाएगा.
हर वार्ड में दस बेड किए रिजर्व
हालांकि अस्पताल प्रशासन ने मॉनसून के दौरान की बीमारियों के लिए अपने स्तर से हर वार्ड में दस बेड रिजर्व कर दिए हैं. यहां सात वार्ड के हिसाब से 70 वार्ड बना दिए गए हैं, लेकिन संकट दवांओं का है. फंड के संकट के लिए नॉर्थ एमसीडी के स्थाई समिति के चेयरमैन जयप्रकाश भी हिंदू राव हॉस्पिटल पहुंचे और दवाओं की किल्लत को लेकर एमएस के साथ डेंगू वार्ड का दौरा किया. इस दौरान हॉस्पिटल की खराब हालत के लिए मुख्यमंत्री केजरीवाल को जिम्मेदार ठहरा दिया. जयप्रकाश ने कहा कि अगर आने वाले दिनों में फंड की कमी से किसी मरीज़ की मौत हो गई तो उसके लिए केजरीवाल सरकार ज़िम्मेदार होगी.
डॉक्टर्स को भी दवाओं की किल्लत के कारण इलाज करने में परेशानी हो रही है. तेजी से बढ़ रहे डेंगू और मलेरिया के मामले डॉक्टर्स के लिए चिंताजनक होते जा रहे हैं.
अंकित यादव