MCD डालने जा रही दिल्लीवालों पर बोझ, कूड़ा उठाने के बदले वसूलेगी शुल्क

दिल्ली नगर निगम ने इसके पीछे तर्क दिया है कि यह हाई कोर्ट का आदेश के तहत फैसला हो रहा है और लोगों को सुविधाएं देंगे तो उसके बदले शुल्क लेने में कोई बुराई नहीं. 

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कूड़ा कूड़ा

अंकित यादव

  • नई दिल्ली,
  • 21 फरवरी 2020,
  • अपडेटेड 3:10 AM IST

  • कूड़ा उठाने के बदले पैसा वसूलेगी MCD
  • फरवरी के अंत तक फैसले को करेगी लागू

दिल्ली नगर निगम दिल्लीवालों को बड़ा झटका देने जा रही है. उत्तरी और दक्षिणी दिल्ली नगर निगम ने आम जनता से कूड़ा उठाने के बदले पैसा वसूलने का फैसला कर लिया है.

क्या होगा शुल्क

50 वर्ग मीटर तक - ₹50 प्रति माह

50 से 200 वर्ग मीटर तक - ₹100 प्रति माह

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200 वर्ग मीटर से अधिक-  ₹200 प्रति माह

स्ट्रीट वेंडर से

₹100 प्रति माह

दुकान ढाबा - ₹500 प्रति माह

होटल- 2000 से ₹5000 तक प्रतिमाह

दिल्ली नगर निगम ने इसके पीछे तर्क दिया है कि यह हाई कोर्ट का आदेश के तहत फैसला हो रहा है और लोगों को सुविधाएं देंगे तो उसके बदले शुल्क लेने में कोई बुराई नहीं. 

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उत्तरी दिल्ली नगर निगम के डिप्टी मेयर योगेश वर्मा ने कहा कि कि सफाई के बदले दिल्लीवालों से मामूली शुल्क वसूला जा सकता है, जिससे दिल्लीवाले आसानी से स्वीकार कर लेंगे, क्योंकि उसके बदले उन्हें बेहतर सुविधा मिलेगी. योगेश वर्मा के मुताबिक, हम यह कदम दिल्ली हाई कोर्ट के निर्देश के बाद उठा रहे हैं. हालांकि, यह कब से लागू होगा इसकी कोई तारीख तय नहीं की गई है. माना जा रहा है कि फरवरी के अंत तक नगर निगम फैसले को लागू करेगी.

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विपक्ष हुआ हमलावर

उधर, इस फैसले के बाद विपक्ष हमलावर हो गया है. विपक्ष का कहना है कि कहीं यह फैसला एमसीडी पर भारी ना पड़ जाए. कांग्रेस पार्षद दल के नेता मुकेश गोयल ने कहा कि कांग्रेस इस प्रस्ताव का विरोध करती है. एक तरफ दिल्ली सरकार दिल्लीवालों को मुफ्त में सुविधाएं दे रही है जिसे दिल्ली के लोग पसंद कर रहे हैं तो दूसरी ओर नगर निगम जिसकी छवि पहले से काफी खराब है अब लोगों से कूड़ा उठाने का शुल्क वसूलने जा रही है.

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दिल्ली में सफाई कर्मचारी एसोसिएशन का मानना है कि शुल्क से उनकी बेहतरी के लिए काम होना चाहिए. वीरेंद्र सिंह चूरियाना (सफाई कर्मचारी कमेटी के अध्यक्ष) ने कहा कि दिल्ली में सफाई कर्मचारियों के साथ सबसे ज्यादा सौतेला व्यवहार नगर निगम ने किया है. 20 साल से ज्यादा नौकरी करने के बावजूद सफाई कर्मियों को अब तक स्थाई नहीं किया गया है और ना ही बकाया भुगतान किया गया है. ऐसे में हमें आशंका है कि इस फंड का भी दुरुपयोग किया जा सकता है.

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