दिल्ली में 20 विधायकों के लाभ के पद का मामला, जानिए कब क्या हुआ?

दिल्ली और आम आदमी पार्टी के लिए यह फैसला बेहद खास साबित हुआ क्योंकि अगर उनकी सदस्यता जाती तो खाली हुए इन जगहों पर उपचुनाव की स्थिति बन जाती लेकिन अब नए फैसले के बाद दिल्ली में चुनावी सरगरमी फिलहाल के लिए टल गई है.

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आम आदमी पार्टी के विधायकों की फाइल फोटो आम आदमी पार्टी के विधायकों की फाइल फोटो

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 23 मार्च 2018,
  • अपडेटेड 4:04 PM IST

दिल्ली में सत्तारुढ़ आम आदमी पार्टी (आप) के लिए शुक्रवार का दिन बेहद शानदार साबित हुआ क्योंकि हाईकोर्ट ने चुनाव आयोग की ओर से लाभ के पद मामले में अयोग्य ठहराए गए 20 विधायकों की सदस्यता बहाल कर दी. साथ ही चुनाव आयोग को फिर से यह केस शुरू करने का निर्देश दिया.

कोर्ट में चुनाव आयोग और विधायकों ने इस मामले में 28 फरवरी को अपनी बहस पूरी की थी और जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस चंद्रशेखर की बेंच ने अपना आदेश सुरक्षित रख लिया था. शुरुआत में लाभ के पद के मामले में आप पार्टी के 21 विधायक शामिल थे, लेकिन राजौरी गार्डन के विधायक जरनैल सिंह के पंजाब विधानसभा चुनाव के लिए इस्तीफा देने से विधायकों की संख्या 20 हो गई थी.

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दिल्ली और आम आदमी पार्टी के लिए यह फैसला बेहद खास साबित हुआ क्योंकि अगर उनकी सदस्यता जाती तो खाली हुए इन जगहों पर उपचुनाव की स्थिति बन जाती लेकिन अब नए फैसले के बाद दिल्ली में चुनावी सरगरमी फिलहाल के लिए टल गई है.

जानते हैं दिल्ली की वर्तमान राजनीति में भूचाल लाने वाले इस मामले में कब क्या हुआ.

13 मार्च 2015: आम आदमी पार्टी ने अपने 20 विधायकों को संसदीय सचिव बनाया.

19 जून 2015: वकील प्रशांत पटेल ने राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी के पास इन सचिवों की सदस्यता रद करने के लिए आवेदन किया. शिकायत में इसे 'लाभ का पद' बताया गया और इन विधायकों की सदस्यता रद्द करने की अपील की गई.

22 जून, 2015: राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने यह शिकायत चुनाव आयोग के पास.

24 जून, 2015: दिल्ली विधानसभा ने दिल्ली विधायी विधानसभा के सदस्य (अयोग्यता को हटाने) (संशोधन विधेयक), 2015 को पास किया.

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13 जून, 2016: तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने विधायकों के विधेयक (अयोग्यता को हटाने) पर अपनी सहमति देने से इनकार किया.

25 जून, 2016: केंद्र सरकार ने दिल्ली सरकार की ओर से पास किए गए 14 बिल वापस किए, जिसमें दिल्ली विधायी विधानसभा के सदस्य (अयोग्यता को हटाने) बिल भी शामिल था.

14-21 जुलाई, 2016: चुनाव आयोग के पास 21 आप विधायकों के लिए व्यक्तिगत सुनवाई की याचिका पहुंची, जिन्हें संसदीय सचिव बनाया गया था. उन पर 'लाभ के पद के मामले में' विधानसभा से उनकी अयोग्यता का खतरा मंडराने लगा.

8 सितंबर, 2016: दिल्ली हाईकोर्ट ने केजरीवाल सरकार को निर्देश दिया कि अपनी पार्टी के 21 विधायकों के संसदीय सचिव के पद से हटाने का निर्देश दिया. इसी दिन चुनाव आयोग ने 2015 में दिल्ली सरकार की ओर से विधायकों को संसदीय सचिव के रूप में नियुक्त किए जाने के लिए कारण बताओ नोटिस जारी किया.

6 जनवरी, 2017: राजौरी गार्डन से आप विधायक जरनैल सिंह ने पंजाब विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए दिल्ली विधानसभा से इस्तीफा दिया.

24 जून, 2017: चुनाव आयोग ने आप पार्टी के 21 विधायकों के लाभ के पद के मामले में केस वापस लेने की याचिका खारिज की.

9 अक्टूबर, 2017: चुनाव आयोग ने लाभ के पद के मामले में 21 विधायकों को स्पष्टीकरण के लिए नोटिस जारी किया.

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19 जनवरी, 2018: लाभ के पद के मामले पर चुनाव आयोग ने आप पार्टी के 20 विधायकों की सदस्यता खत्म करने की सिफारिश की और राष्ट्रपति को इस संबंध में पत्र भेजा. पार्टी ने इस पर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया और स्टे की मांग की, जिसे कोर्ट ने खारिज किया.

21 जनवरी, 2018: राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने चुनाव आयोग की सिफारिश मानी और आप पार्टी के 20 विधायकों को अयोग्य करार दिया. राष्ट्रपति के आदेश के बाद सदस्यता गंवाने वाले 20 विधायकों में से कुल 8 पूर्व विधायकों ने याचिका लगाई कि कोर्ट का फैसला आने तक चुनाव आयोग रिक्त हुई इन सीटों पर उपचुनाव की घोषणा ना करे.

24 जनवरी, 2018: दिल्ली हाईकोर्ट ने 20 विधायकों को अयोग्य घोषित करने संबंधी केंद्र सरकार की अधिसूचना पर रोक लगाने से इनकार किया.

7 फरवरी. 2018: हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई रोजाना करने की बात कही.

28 फरवरी, 2018: हाईकोर्ट में चुनाव आयोग और विधायकों ने इस मामले में अपनी बहस पूरी की और जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस चंद्रशेखर की बेंच ने अपना आदेश सुरक्षित रख लिया.

23 मार्च, 2018: हाईकोर्ट ने चुनाव आयोग के फैसले को पलटा, और उसे निर्देश दिया कि 20 विधायकों की दलीलों को फिर से सुना जाए. इस फैसले के बाद इन विधायकों की सदस्यता बहाल हो गई.

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