SC के नोटिस पर बोली दिल्ली सरकार- मरीजों के लिए दिन-रात काम कर रहे डॉक्टर

केजरीवाल सरकार ने कहा कि राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) एक स्वतंत्र संस्था है. गुरूवार को एनएचआरसी की टीम ने एनएलजेपी अस्पताल का दौरा भी किया था. एनएचआरसी की टीम एलएनजेपी अस्पताल में कोरोना मरीजों के लिए की गई व्यवस्थाओं को लेकर संतुष्ट दिखी थी. हम सुप्रीम कोर्ट को इस रिपोर्ट के बारे में अवगत कराएंगे.

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दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल (Courtesy- PTI) दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल (Courtesy- PTI)

पंकज जैन

  • नई दिल्ली,
  • 13 जून 2020,
  • अपडेटेड 12:39 AM IST

  • दिल्ली के अस्पतालों के डॉक्टर और निर्सिंग स्टाफ दिन-रात कर रहे काम
  • कोरोना मरीजों के इलाज में डटे स्वास्थ्यकर्मी 2 महीने से नहीं जा पाए घर

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के एलएनजेपी अस्पताल समेत कई हॉस्पिटलों में भर्ती मरीजों की स्थिति को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी किया है, जिस पर दिल्ली सरकार ने प्रतिक्रिया दी है और अस्पताल का बचाव किया है. केजरीवाल सरकार ने कहा कि दिल्ली में एलएनजेपी अस्पताल कोरोना वायरस का सबसे बड़ा अस्पताल है. वर्तमान में कोरोना मरीजों के इलाज के लिए इस अस्पताल में 2 हजार बेड की व्यवस्था की गई है.

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आम आदमी पार्टी की सरकार ने कहा कि केंद्र सरकार के अस्पतालों और दिल्ली के दूसरे अस्पतालों में इलाज कराने आ रहे कोरोना मरीजों को भी जरूरत पड़ने पर एलएनजेपी अस्पताल में रेफर किया जाता है. अब तक इस अस्पताल से 2100 से ज्यादा कोरोना मरीज स्वस्थ होकर अपने घर जा चुके हैं.

दिल्ली सरकार ने कहा कि यह एक असाधारण स्थिति है और हम पहले दिन से ही बेहतर बुनियादी ढांचा बनाने व सभी कोरोना मरीजों को स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने की पूरी कोशिश कर रहे हैं. हमारे अस्पतालों के सारे फ्रंटलाइन वर्कर्स यानी डॉक्टर्स और नर्सिंग स्टाफ लोगों की सेवा के लिए दिन-रात काम कर रहे हैं. मरीजों की सेवा के प्रति समर्पित अस्पताल में तैनात कई डॉक्टर पिछले 2 महीने से अपने घर भी नहीं गए हैं.

केजरीवाल सरकार ने कहा कि राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) एक स्वतंत्र संस्था है. गुरुवार को एनएचआरसी की टीम ने एनएलजेपी अस्पताल का दौरा भी किया था. एनएचआरसी की टीम एलएनजेपी अस्पताल में कोरोना मरीजों के लिए की गई व्यवस्थाओं को लेकर संतुष्ट दिखी थी. हम सुप्रीम कोर्ट को इस रिपोर्ट के बारे में अवगत कराएंगे.

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दिल्ली सरकार ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट भारत का सर्वोच्च न्यायालय है और हम उनकी टिप्पणियों को अत्यंत सम्मान और पूरी ईमानदारी के साथ स्वीकार करते हैं. हमारी सरकार सभी के लिए हेल्थ केयर प्रदान करने और कोरोना मरीजों को हर संभव इलाज सुनिश्चित करने के लिए दृढ़ संकल्प है. इसके बावजूद अगर अस्पताल में कोई भी कमी हमारे सामने आती है, तो हम उस पर तुरंत कार्रवाई करेंगे.

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आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने सरकारी अस्पतालों के हालात पर दिल्ली, महाराष्ट्र, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल को नोटिस जारी किया है. इनके साथ दिल्ली के एलएनजेपी समेत कई हॉस्पिटल को भी नोटिस जारी किया गया है. इस नोटिस में सुप्रीम कोर्ट ने सरकारी अस्पतालों में भर्ती मरीजों के हालत पर जवाब तलब किया गया है.

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सुप्रीम कोर्ट ने राज्य के मुख्य सचिवों और हॉस्पिटल के डायरेक्टर से मरीजों के इलाज की स्थिति और स्टाफ समेत कई जानकारी मांगी है, ताकि कोर्ट मरीजों की सुविधा के लिए आदेश जारी कर सके. इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से मरीजों के इलाज और शवों के अंतिम संस्कार को लेकर जारी गाइडलाइन पर भी जवाब मांगा है.

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