सुसाइड करने वाले फौजी के परिवार को 1 करोड़ देने पर पलटी केजरीवाल सरकार

सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने पूछा कि इस मामले में दिल्ली सरकार की पॉलिसी क्या है? किस आधार पर ये घोषणा की गई? इस पर सरकार का कहना था कि इस मामले में कैबिनेट मीटिंग के बाद ये घोषणा करने का फैसला लिया गया. हाई कोर्ट ने जनहित याचिका पर सुनवाई करने के बाद 14 नवंबर के लिए अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है.

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रामकिशन ग्रेवाल रामकिशन ग्रेवाल

अंजलि कर्मकार / पूनम शर्मा

  • नई दिल्ली,
  • 07 नवंबर 2016,
  • अपडेटेड 2:47 PM IST

पूर्व फौजी रामकिशन ग्रेवाल को शहीद का दर्जा देने और एक करोड़ रुपये का मुआवजा देने के केजरीवाल सरकार के फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी गई है. लेकिन, सोमवार को जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान दिल्ली सरकार अपने ही फैसले पर यू टर्न लेती नजर आई. दिल्ली सरकार ने कहा कि सरकार की ये घोषणा फिलहाल अपरिपक्व (Premature) है. इस फैसले की मंजूरी के लिए फाइल एलजी के पास भेजा जाना है. एलजी की स्वीकृति के बाद ही इस पर अभी कोई फ़ैसला लिया जा सकता है.

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कोर्ट ने पूछे ये सवाल
सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने पूछा कि इस मामले में दिल्ली सरकार की पॉलिसी क्या है? किस आधार पर ये घोषणा की गई? इस पर सरकार का कहना था कि इस मामले में कैबिनेट मीटिंग के बाद ये घोषणा करने का फैसला लिया गया. हाई कोर्ट ने जनहित याचिका पर सुनवाई करने के बाद 14 नवंबर के लिए अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है.

याचिका में दिए गए ये तर्क
बता दें, हाई कोर्ट में दिल्ली सरकार के खिलाफ एक याचिका लगाई गई है. इसमें कहा गया है कि वन रैंक वन पेंशन (OROP) को लेकर आत्महत्या करने वाले पूर्व फौजी रामकिशन ग्रेवाल को एक करोड़ का मुआवजा देने के दिल्ली सरकार के फ़ैसले को रद्द किया जाए. सरकार का ये फैसला राजनीति से प्रेरित है. रामकिशन ग्रेवाल ना तो दिल्ली निवासी थे और न ही दिल्ली मे कार्यरत रहे. लिहाजा इस तरह की सरकार की घोषणा बेमतलब है. आत्महत्या करने वाले किसी शख्स को शहीद का दर्जा कैसे दिया जा सकता है?

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जहर खाकर की खुदकुशी
गौरतलब है कि बुधवार सुबह राजधानी दिल्ली में वन रैंक-वन पेंशन की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे पूर्व सैनिक रामकिशन ग्रेवाल ने जहर खाकर आत्महत्या कर ली. रामकिशन हरियाणा के रहने वाले थे. पुलिस के मुताबिक, वह वन रैंक-वन पेंशन मुद्दे पर सरकार के फैसले से असहमत थे. जिसकी वजह से वह अपने कुछ साथियों के साथ सोमवार से जंतर-मंतर पर धरने पर बैठे थे.

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