राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में कोरोना वायरस से संक्रमण के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं. दिल्ली सरकार बढ़ते मामलों को देखते हुए स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर गंभीर हो गई है, तो वहीं केंद्र सरकार भी सक्रिय हो गई है. दिल्ली में कोरोना संक्रमण के फैलाव का आकलन करने के लिए अब सिरोलॉजिकल सर्वे होगा. शुक्रवार को इसकी शुरुआत भी हो गई.
दिल्ली में सिरोलॉजिकल सर्वे 27 जून से 10 जुलाई तक नेशनल सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल (एनसीडीसी) के सहयोग से करवाया जा रहा है. इस दौरान 20000 लोगों के सैंपल लेकर कोरोना वायरस के शहर में फैलाव का आकलन किया जाएगा. सिरोलॉजिकल सर्वे की टीम ने पुरानी दिल्ली के सीताराम बाजार इलाके में सैंपल लिए. इस सर्वे के तहत एक घर से एक सदस्य का रैंडम ब्लड सैंपल लिया जाता है. घर के रैंडम सदस्य को चुनने के लिए एक मोबाइल एप का इस्तेमाल किया जाता है. ब्लड सैंपल की रिपोर्ट 48 घंटे में आती है.
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सिरोलॉजिकल सर्वे टीम में एक डॉक्टर, लैब टेक्निशियन, टास्क फोर्स और आंगनबाड़ी की महिला सदस्य होती हैं. सिरोलॉजिकल सर्वे असल में एक ब्लड टेस्ट ही है, जिसमें व्यक्ति के शरीर से ब्लड सैंपल लेकर देखा जाता है कि व्यक्ति के शरीर में कोरोना से लड़ने के लिए एंटी बॉडीज बन रही हैं या नहीं. रक्त में एंटीबॉडीज बनने का मतलब है कि व्यक्ति वायरस के संपर्क में आया है.
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इस सर्वे के जरिए संक्रमण के फैलाव का आकलन किया जाएगा, जिससे कोरोना की रोकथाम के लिए रणनीति बनाने में मदद मिलेगी. साथ ही इस संबंध में भी जानकारी मिल सकेगी कि दिल्ली में कोरोना किस हद तक अपने पांव फैला चुका है. पूरी दिल्ली में 10 जुलाई तक हर उम्र के कुल 20,000 लोगों के सैंपल लिए जाएंगे और देखा जाएगा कि क्या वे कभी इस खतरनाक वायरस के संपर्क में आए हैं?
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सर्वे में यह भी देखा जाएगा कि जो लोग पॉजिटिव से नेगेटिव हुए, उनके अंदर इस वायरस का किस तरह का प्रभाव पड़ रहा है. इस सर्वे को कराने का एक मुख्य कारण यह भी है कि जिन लोगों में लक्षण आते हैं या जो गंभीर हो जाते हैं, वो तो अपना टेस्ट करवाकर, इलाज करवाकर पॉजिटिव से नेगेटिव हो जाते हैं. लेकिन ऐसे भी बहुत से लोग होते हैं जो इस वायरस से संक्रमित होकर बिना लक्षण वाले बने रहते हैं. वे ठीक भी हो जाते हैं, लेकिन उनको इसका पता भी नहीं चलता.
पंकज जैन