लॉ यूनिवर्सिटी में छात्राओं की पिंजड़ा तोड़ हड़ताल, प्रशासन इजाजत देने को राजी नहीं

छत्तीसगढ़ के लॉ यूनिवर्सिटी में छात्राएं आधी रात तक हॉस्टल से बाहर रहने के लिए पिंजड़ा तोड़ हड़ताल कर रही है, प्रशासन आंदोलनरत छात्रों की कई मांगों पर तो राजी है लेकिन छात्राओं की इस मांग पर नहीं.

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आंदोलनरत छात्राएं आंदोलनरत छात्राएं

सुरेंद्र कुमार वर्मा / सुनील नामदेव

  • रायपुर,
  • 03 सितंबर 2018,
  • अपडेटेड 7:31 PM IST

हिदायतुल्ला नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी में छात्र-छात्राओं की पिछले दो हफ्ते से चली आ रही हड़ताल खत्म होने का नाम ही नहीं ले रही. टीचिंग स्टाफ इस बात से हैरत में है कि छात्राएं आधी रात तक हॉस्टल से बाहर रहने की मांग पर अड़ी हुई हैं जबकि वाइस चांसलर इसके लिए राजी नहीं हैं.

दरअसल, छात्राओं की मांग है कि उन्हें भी लड़कों की तरह हॉस्टल वापसी का समय दिया जाना चाहिए. हिदायतुल्ला लॉ यूनिवर्सिटी में छात्राओं की रात में हॉस्टल वापसी के समय में छात्रों की तुलना में लगभग डेढ़ घंटे का अंतर है.

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छात्राओं का पिंजड़ा तोड़ हड़ताल

यूनिवर्सिटी कैम्पस से बाहर जाने वाली छात्राओं को छात्रों से पहले अपने हॉस्टल में लौटना होता है. इसके विरोध में छात्राएं पिंजड़ा तोड़ हड़ताल कर रही हैं. उनका आरोप है कि वे हॉस्टल में कैद पंछी की तरह हैं. कुछ छात्राओं ने तो टीचिंग स्टाफ पर भी उनके साथ बदसलूकी करने का आरोप लगाया है. यही नहीं कुछ छात्राओं का कहना है कि उनके साथ अच्छा व्यवहार नहीं हो रहा.

कई छात्राओं ने गोपनीय शिकायत कर कुछ प्रोफेसरों की उन पर गंदी नजर होने और यौन उत्पीड़न की कोशिश करने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं. हालांकि यूनिवर्सिटी प्रशासन ने इस तरह की किसी भी शिकायतों की पुष्टि नहीं की, लेकिन छात्राओं ने इस बाबत मौखिक और लिखित शिकायत दर्ज कराने की बात स्वीकार की है.

उन्होंने कहा कि नए वीसी के साथ हुई बातचीत में उन्होंने यौन उत्पीड़न के बारे में अपनी लिखित आपत्ति भी दर्ज कराई है.

छात्रों की 14 सूत्रीय मांग

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नया रायपुर स्थित हिदायतुल्ला नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी में उस समय से गतिरोध उत्पन्न हो गया है जबसे यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर प्रोफेसर सुखपाल सिंह की नियुक्ति को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने गैरकानूनी करार दिया. इसके बाद प्रोफेसर सुखपाल सिंह को अपने पद से हटना पड़ा.

हाईकोर्ट के निर्देश पर छत्तीसगढ़ शासन के विधि सचिव आरएस शर्मा ने प्रभारी वाइस चांसलर का पदभार ग्रहण किया. इसके बाद उन्होंने हड़ताली छात्र-छात्राओं से मुलाकात की. उन्होंने हड़ताली छात्राओं की मांगों पर शांतिपूर्वक तरीके से विचार-विमर्श करने का आश्वासन भी दिया, लेकिन छात्र हड़ताल पर ही अड़े रहे. यहां तक की उन्होंने अपनी नई मांगें भी रख दी.

छात्रों ने 14 सूत्रीय मांग यूनिवर्सिटी प्रशासन के समक्ष रखी है, जिसमें लाइब्रेरी की टाइमिंग बढ़ाने से लेकर प्रशासनिक पदों पर शिक्षकों की नियुक्ति न करने, ऑडिट रिपोर्ट सार्वजनिक करने, एक्जीक्यूटिव काउंसिल में विद्यार्थियों के मुद्दों को प्रमुखता से रखे जाने, फैकल्टी का फीडबैक लेने जैसे मुद्दे प्रमुख है.

रातभर कैम्पस में घूमने की आजादी नहीं

हड़ताली छात्रों का कहना है कि जब तक उनकी सारी मांगें पूरी नहीं होती वो आंदोलन जारी रखेंगे. उधर, हिदायतुल्ला नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी के अंतरिम कुलपति रविशंकर शर्मा ने दो टूक शब्दों में कहा कि वे विद्यार्थियों की सारी मांगे मानने को तैयार हैं, लेकिन उन्हें रातभर कैम्पस में घूमने की आजादी नहीं दे सकते. सुरक्षा और नैतिक दृष्टिकोण से यूनिवर्सिटी इसके लिए तैयार नहीं है.

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हिदायतुल्ला नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी के छात्रों की इस आंदोलन को देश के कई छात्र संगठनों का भी समर्थन मिल रहा है. जेएनयू की स्टूडेंट यूनियन अध्यक्ष गीता कुमारी ने सोशल मीडिया के माध्यम से आंदोलन का समर्थन करते हुए छात्राओं की बंदिशों के साथ-साथ वार्डन और कुलपति की न्युक्ति के खिलाफ आवाज उठाई है. फिलहाल हड़ताली छात्र-छात्राएं अपनी मांगों को लेकर डटे हुए हैं.

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