छत्तीसगढ़ः वेतन वृद्धि को लेकर हड़ताल पर सरकारी नर्सें, सरकार ने लगाया एस्मा

दूसरी ओर, नर्सों ने ऐलान किया है कि वो सरकार के दबाव में नहीं आने वाली. भले ही वो एस्मा लगाए या उन्हें गिरफ्तार करें. गौरतलब है कि नौकरी पक्की करने और वेतन भत्तों में बढ़ोतरी की मांग को लेकर सरकारी अस्पतालों की लगभग 10 हजार नर्से हड़ताल पर चली गई हैं.

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अनिश्चितकालीन हड़ताल पर नर्सें अनिश्चितकालीन हड़ताल पर नर्सें

सुनील नामदेव

  • रायपुर,
  • 30 मई 2018,
  • अपडेटेड 6:53 PM IST

सैलरी बढ़ाए जाने की मांग को लेकर छत्तीसगढ़ के सरकारी अस्पतालों की नर्से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं. हड़ताल खत्म कराने को लेकर सरकार ने राज्य में एस्मा (ESMA) लगा दिया है. हालांकि इसके जल्द खत्म होने के आसार भी नहीं दिख रहे.

नर्सों के पिछले 12 दिन से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाने से सरकारी अस्पताल प्रशासन और वहां भर्ती मरीजों की हालत खराब हो गई है. कई मरीजों की अस्पताल से छुट्टी कर दी गई है, तो कइयों के ऑपरेशन तक टाल दिए गए. नर्सों की कमी के चलते डाक्टरों ने भी नए मरीज भर्ती करने कम कर दिए हैं.

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10 हजार नर्से हड़ताल पर

दूसरी ओर, नर्सों ने ऐलान किया है कि वो सरकार के दबाव में नहीं आने वाली. भले ही वो एस्मा लगाए या उन्हें गिरफ्तार करें. गौरतलब है कि नौकरी पक्की करने और वेतन भत्तों में बढ़ोतरी की मांग को लेकर सरकारी अस्पतालों की लगभग 10 हजार नर्से हड़ताल पर चली गई हैं.

राज्य के सभी सरकारी अस्पतालों के नर्सों की हड़ताल के कारण मरीजों के ऑपरेशन पर सबसे ज्यादा असर पड़ा है. जिला अस्पतालों से लेकर रायपुर के सबसे बड़े डॉक्टर भीमराव अंबेडकर अस्पताल में हड्डी रोग के विभाग की सर्जरी के लिए मरीजों को डेढ़ से दो माह तक का इंतजार करना होगा.

15 दिन तक के लिए टल रहे ऑपरेशन

हड़ताल को 12 दिन बीत चुके हैं. लिहाजा सभी सरकारी अस्पतालों की हालत दिनों दिन खराब होती जा रही है. न्यूरो सर्जरी में भी रूटीन में होने वाले ऑपरेशन पंद्रह दिनों के लिए टाल दिए गए हैं.

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सरकारी अस्पतालों में केवल इमरजेंसी वाले ऑपरेशन ही किए जा रहे हैं. इसके लिए भी मरीजों और उनके परिजनों को काफी मशक्क्त करनी पड़ रही है.

डॉक्टरों के मुताबिक उन्होंने रूटीन वाले सारे ऑपरेशन टाल दिए हैं. डॉक्टरों की दलील है कि नर्सों की अनुपस्थिति के चलते यह संभव नहीं है कि रूटीन और इमरजेंसी ऑपरेशन एक साथ किए जाएं. इसलिए उनका पूरा ध्यान सिर्फ इमरजेंसी पर है.

सरकारी अस्पतालों में नर्सों की हड़ताल का हवाला देकर डॉक्टर मरीजों को लौटा रहे हैं. ज्यादातर अस्पतालों में ऑर्थो के अलावा जनरल सर्जरी, न्यूरो सर्जरी, प्लास्टिक सर्जरी, ईएनटी, नेत्र रोग और गायनी में मरीजों की सर्जरी की तारीख पंद्रह-पंद्रह दिनों तक बढ़ा दी गई है. नर्सों के हड़ताल पर जाने से पहले ही डॉक्टरों ने सामान्य तौर पर कई मरीजों की सर्जरी फिक्स कर दी थी, लेकिन अब उसे टाला जा रहा है.

अस्पताल में नई भर्ती नहीं

नर्सों की हड़ताल को देखते हुए डॉक्टर नए मरीजों को ना तो भर्ती की तारीख दे पा रहे हैं और ना ही ऑपरेशन की. दूसरी ओर, नर्सों की हड़ताल खत्म कराने को लेकर स्वास्थ्य विभाग के अफसर भी कोई खास पहल नहीं कर रहे हैं.

हालांकि मंगलवार को बीजेपी के महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने पार्टी मुख्यालय में संगठन के पदाधिकारियों से हड़ताली कर्मचारियों के मांगों के बारे में लंबी चर्चा की.

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नर्सों की हड़ताल से ऑपरेशन ही नहीं दूसरी अन्य सेवाएं भी प्रभावित हुई हैं. मरीजों को इंजेक्शन लगाने और दवा देने के लिए नर्स ढूंढ़ना पड़ रहा है. हालांकि प्रशिक्षु नर्सों से काम चलाया जा रहा है, लेकिन यह सब भी नाकाफी साबित हो रहा है.

राज्य में एस्मा लगाए जाने के बावजूद नर्सों की हड़ताल ना तो खत्म हुई है और ना ही वे ड्यूटी पर लौटी हैं. राज्य के स्वास्थ्य मंत्री अजय चंद्राकर ने हड़ताली नर्सों से कार्य पर लौट आने की अपील की है. हड़ताली नर्सों की मांग है कि उनका वेतन ग्रेड पे 2,800 रुपये से बढ़ाकर 4,600 रुपये किया जाए. यही नहीं उनकी नौकरी भी पक्की की जाए.

फ़िलहाल एस्मा को कारगर बनाने के लिए पुलिस को सक्रिय किया गया है. एस्मा लगाए जाने और हड़ताल को गैर कानूनी घोषित किए जाने के बाद पुलिस अब प्रदर्शनकारी नर्सों को अपनी हिरासत में ले सकती है.

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