गंगा की दुर्दशा, घटता पानी और बढ़ती रेत के बीच केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी जल परिवहन परियोजना को एकदूसरे से जोड़ते हुए बिहार सरकार ने साफ कर दिया है कि वो किसी भी सूरत में गंगा में जहाज चलाने की अनुमति नहीं देगी. इसके लिए वो सुप्रीम कोर्ट तक जाने को तैयार है. गंगा की दुर्दशा और इसके लिए उपाय करने के लिए देश और दुनिया को जगाने के लिए बिहार सरकार दिल्ली के इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में 18 और 19 मई को एक काॉफ्रेंस करने जा रही है.
बिहार के जल संसाधन मंत्री राजीव रंजन सिंह ने कहा कि पहले ही गंगा में गाद की जबरदस्त समस्या है. ऐसे में गंगा में पांच से दस मीटर तक ड्रेजिंग यानी खुदाई करना इसकी सेहत पर गंभीर परिणाम डालेगा. क्योंकि तब खुदाई की मिट्टी भी गंगा जल में गाद बनाएगी. ऐसे में राज्य में बाढ़ की समस्या और गंभीर होगी. लिहाजा बिहार सरकार इस बात की कतई इजाजत नहीं देगी कि बिना गाद निकाले गंगा को और तबाह किया जाए.
गंगा के बहाव में रुकावट की दशा ये है कि बक्सर में बिहार में प्रवेश करने वाली गंगा 102 किलोमीटर दूरी तय कर पटना के गांधी घाट तक पहुंचती है तो चार घंटे लगते हैं, लेकिन भागलपुर पहुंचते पहुंचते नदी थक जाती है. भागलपुर से फरक्का तक 172 किलोमीटर का सफर चार दिन में तय करती है. अब तो अंदाजा लगाया ही जा सकता है कि विकास के नाम पर गंगा की क्या दशा हो गई है.
राजीव रंजन सिंह कहते हैं कि फरक्का बांध का डिजाइन गलत होने की वजह से गंगा में लगातार गाद बढ़ रही है. फरक्का बांध को 27 लाख क्यूसेक पानी के बहाव के हिसाब से डिजाइन किया गया है, लेकिन मोकामा में बनाया गया पुल 32 लाख क्यूसेक पानी छोड़ता है. ऐसे में जमा कर रोका गया पानी बड़ी समस्या बन गया है. वे कहते हैं कि फरक्का सहित अन्य बांध बनाये जाने से रोका गया पानी तो बह जाता है लेकिन रेत जम जाती है. उसका ना तो नियमित बहाव होता है ना ही नियमित निकासी. ऐसे में गंगा में मिलने वाली सहायक नदियों तक के मुहाने जाम हो रहे हैं. केंद्र सरकार का कानून ऐसा है कि वे राज्य की जनता के लिए एक छटांक पानी तक अपनी मर्जी से नहीं ले पाते. वहीं राज्य को बाढ़ की विभीषिका अपने दम पर ही झेलनी होती है. उस पर से नमामि गंगे का नाटक अलग से है.
गौरतलब है कि गंगा पर बनाये गये बांधों की वजह से बिहार में गंगा अपनी तय राह छोड़कर पटना में ही चार किलोमीटर दक्षिण की ओर खिसक गई है. बाढ़ प्रभावित इलाका बढ़ रहा है. इसी वजह से हाइएस्ट फ्लड लेवल भी काफी ऊपर खिसक गया है. केंद्र सरकार की ओर से बनाई गई चितले समिति ने भी अपनी रिपोर्ट में सिल्ट की समस्या के साथ साथ फरक्का बांध के डिजाइन में खामी की ओर ध्यान दिलाया है लेकिन इस पर कुछ भी नहीं हुआ.
संजय शर्मा