बिहार सरकार के दलित और आदिवासी अभ्यर्थियों को प्रोत्साहन राशि देने के फैसले का एससी, एसटी छात्रों ने स्वागत किया है. हालांकि उनका कहना है कि देशभर में कमजोर वर्ग के छात्रों के मुखर होने का असर है कि बिहार सरकार ने इस तरह का फैसला किया है.
बिहार सरकार ने एससी और एसटी वर्ग के अभ्यर्थियों को केंद्रीय लोकसेवा आयोग और बिहार लोकसेवा आयोग की मुख्य परीक्षा की तैयारी के लिए प्रोत्साहन के तौर पर आर्थिक मदद देने का फैसला किया है.
इसके तहत जो छात्र प्रारंभिक परीक्षा पास कर लेंगे, उन्हें मुख्य परीक्षा की तैयारी के लिए बिहार सरकार आर्थिक मदद मुहैया कराएगी. जो एसटी,एससी अभ्यार्थी बीपीएससी की पीटी परीक्षा पास करेंगे उन्होंने मेंस की तैयारी के लिए 50 हजार तथा जो यूपीएससी की पीटी परीक्षा क्वालिफाई करेंगे उन्हें 1 लाख रुपये मेंस की तैयारियों के लिए दी जाएगी. यह फैसला इसी साल से लागू होगा.
कुछ छात्र इसकी वजह देशभर में उभरे दलित छात्रों के आक्रोश को मानते हैं. बीपीएससी की पीटी परीक्षा पास कर मेंस की तैयारी कर रहे अमर ज्योति ने कहा, पूरे देश में दलितों के आक्रोश को देखते हुए सरकार ने यह फैसला लिया है. उनका कहना है कि 2019 के चुनाव से पहले केंद्र की बीजेपी सरकार भी कोई बड़ी घोषणा दलितों के लिए कर सकती है.
वहीं, बिहार सरकार का कहना है कि उन्होंने यह फैसला इसलिए लिया है क्योंकि आर्थिक रूप से कमजोर छात्र पीटी तो पास कर लेते हैं लेकिन मेंस की तैयारी के लिए उन्हें आर्थिक मदद की जरूरत होती है. इसलिए सरकार ने यह फैसला लिया ताकि ये छात्र भी बेहतर ढंग से इसकी तैयारी कर सकें.
सरकार के मुख्य सचिव अंजनी कुमार सिंह के मुताबिक हर साल करीब 1500 एससी/एसटी अम्यार्थी बीपीएससी और 200 अभ्यर्थी यूपीएससी का पीटी पास करते हैं. ये प्रोत्साहन राशि इसलिए दी जा रही है क्योंकि वो बेहतर ढंग से मेंस की तैयारी कर सकें.
सुजीत झा / वरुण शैलेश