75वां स्वतंत्रता दिवस विशेषांक-पथप्रवर्तक / सिनेमा
देव आनंद (1923-2011)
जैकी श्रॉफ
देव आनंद का पोर-पोर शानदार था. अपने शिखर पर वे देश की जान थे. हिंदी सिनेमा में वे स्टाइल के पर्याय थे. उनके चलने, देखने और बोलने में एक अंदाज होता था. वे पहनावे में स्टाइल लेकर आए, चाहे शर्ट के कॉलर हों या उनके स्कार्फ.
वे भड़कीले थे पर हमेशा गरिमापूर्ण. उनकी आंखों में एक चमक थी और उनमें एक किस्म की पवित्रता थी, जिससे वे बुरे किरदार निभाते हुए भी अच्छे उभरकर आते थे.
मैं बच्चा था तब मेरी मां उनकी तरह मेरे बाल बना देती थीं. जब उनकी फिल्में देखने लगा तो उनमें ऐसा बह गया कि उनकी तरह बोलने लगा. मैं मॉडलिंग कर रहा था, तभी उन्होंने स्वामी दादा में मुझे बड़ा ब्रेक दिया.
उन्होंने कहा (देव आनंद के अंदाज में बोलते हुए), ''सुबह सुबह तुम्हारी तस्वीर देखी और अब तुम सामने खड़े हो.’’ फिर 15 दिन बाद उन्होंने माफी मांगी और कहा कि मेरी जगह मिथुनदा को लिया है क्योंकि वे बहुत अच्छे डांसर हैं.
आखिरकार उन्होंने मुझे टहलुए के रोल में कास्ट किया. एक बार फाइट मास्टर नाराज होकर मुझ पर चिल्लाने लगा. वे खड़े हुए और कहा, ‘‘शांत. नया लड़का है. सीख जाएगा. उसे वक्त दो और दिखाओ कि कैसे करना है.’’
हर अदाकार के साथ इज्जत से पेश आने का वह रवैया मेरे दिलो-दिमाग में बस गया. उन्हीं के जैसे महान लोगों से आप सीखते हैं कि कैसे जमीन से जुड़े रहें और सबको सहज महसूस करवाएं. ठ्ठ
जैकी श्रॉफ ने रामलखन, परिंदा और रंगीला जैसी फिल्मों में काम किया है.
aajtak.in