नई नस्ल 100 नुमाइंदे/नवोन्मेषक
प्रियंका दास राजकाकाती, 30 वर्ष
एयरोस्पेस इंजीनियर और कलाकार, असम
प्रियंका दास राजकाकाती कलाकार बनना चाहती थीं, पर तारे हमेशा उन्हें बहुत लुभाते थे. तो इस एरोस्पेस इंजीनियर ने अपने दोनों जुनून को मिलाकर ऐसा पेशेवर सफर शुरू किया जो कम ही भारतीय करते हैं.
उनकी कलाकृति अंतरराष्ट्रीय मून गैलरी परियोजना में शामिल करने के लिए चुनी गई, जिसका मकसद लूनर लैंडर मिशन के जरिए 2022 तक कलाकृतियां चांद पर भेजना है. वे मॉड्यूलर और पुन: इस्तेमाल योग्य कक्षीय अंतरिक्ष वाहन विकसित, उत्पादित और संचालित करने के काम में जुटी फ्रांको-जर्मन अंतरिक्ष टेक्नोलॉजी कंपनी—दि एक्सप्लोरेशन कंपनी—की सह-संस्थापक और जीएनसी इंजीनियर (नेविगेशन) हैं.
उन्हें अब बर्लिन स्थित एक लाभ-निरपेक्ष फाउंडेशन की ओर से स्थापित करमन प्रोजेक्ट के एकवर्षीय फेलोशिप कार्यक्रम के लिए भी चुना गया है. यह फेलोशिप अंतरिक्ष के क्षेत्र में असाधारण उपलब्धियां हासिल करने वाले 45 साल से कम उम्र के 15 लोगों को साथ लाई है.
प्रियंका अपने गृहराज्य असम में एक अभियान चलाने का मनसूबा बना रही हैं, जिसमें यह जागरूकता पैदा करेंगी कि अंतरिक्ष टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल रोजमर्रा की जिंदगी को बेहतर बनाने के लिए भी किया जा सकता है.
वे असम के सुदूर गांव से लेकर पहली दुनिया के सबसे हाई-टेक शहरों तक मानव जीवन के हर क्षेत्र में कलाओं और विज्ञान के सौहार्द्रपूर्ण सह-अस्तित्व की खोजबीन और प्रदर्शन भी करना चाहती हैं.
‘‘प्रियंका कला और भाषा में अपनी प्रतिभा की बदौलत अलग कुछ कर सकीं न कि इसलिए कि उनकी फिजिक्स बहुत अच्छी है’’
बिक्रम फूकुन,
प्रोफेसर-फिजिक्स, सेंट स्टीफेंस कॉलेज, दिल्ली
जमीनी संघर्ष : 25 साल की उम्र में एक गंभीर दुर्घटना के बाद उन्हें अपने पैर पर चलना दोबारा सीखना पड़ा.
कौशिक डेका