जूझना पूर्वाग्रहों से 

आखिरी गिनती के मुताबिक उनके और उनकी आम आदमी पार्टी (आप) के खिलाफ लगभग 186 मामले थे. उन्होंने अदाणी समूह के विरुद्ध आरोप लगाए और कहा कि अदाणी की विदेशी फर्जी (शेल) कंपनियों के मामले में जांच नहीं हो रही है.

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आतिशी मार्लेना, दिल्ली सरकार में शिक्षा एवं लोक निर्माण विभाग मंत्री आतिशी मार्लेना, दिल्ली सरकार में शिक्षा एवं लोक निर्माण विभाग मंत्री

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 31 मार्च 2023,
  • अपडेटेड 2:42 PM IST

इंडिया टुडे कॉन्क्लेव 2023

राजनीति  एकालाप

भारत का विचार: तर्कशील भारत तथा 'बहुत ताकतवर और सामान्य' के बीच की लड़ाई

आतिशी मार्लेना, दिल्ली सरकार में शिक्षा एवं लोक निर्माण विभाग मंत्री 

दिल्ली की शिक्षा मंत्री आतिशी मार्लेना ने कहा कि हलांकि यह सच है कि भारत का आर्थिक विकास हुआ है, लेकिन यहां स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे मोर्चे अभी चिंता का विषय हैं. केंद्र सरकार की प्राथमिकता सूची में स्वास्थ्य और शिक्षा के अब तक नीचे रहने से भारत मानव विकास सूचकांक पर आधारित रैंकिंग में नीचे फिसल रहा है.

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विविधता को भारत की सबसे बड़ी ताकत बताते हुए उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी महत्वपूर्ण आवाज का प्रतिनिधित्व करती है, क्योंकि यहां बहुत लंबे समय तक राजनीति को कुछ लोगों के लिए आरक्षित समझा जाता रहा है. उन्होंने असहमति के अधिकार के खिलाफ केंद्र की कार्रवाई तथा विपक्षी नेताओं को निशाना बनाने और उनकी आवाज दबाने के लिए केंद्रीय एजेंसियों के इस्तेमाल पर केंद्र सरकार को आड़े हाथ लिया.

उन्होंने कहा कि उन्हें तो अब याद भी नहीं है कि भाजपा ने उनके खिलाफ मानहानि के कितने केस कर रखे हैं-आखिरी गिनती के मुताबिक उनके और उनकी आम आदमी पार्टी (आप) के खिलाफ लगभग 186 मामले थे. उन्होंने अदाणी समूह के विरुद्ध आरोप लगाए और कहा कि अदाणी की विदेशी फर्जी (शेल) कंपनियों के मामले में जांच नहीं हो रही है.

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सरकार के खिलाफ आवाज उठाने पर केंद्रीय एजेंसियां धमका रही हैं और यही भारत के विचार को चुनौती देने के मूल में है. राय व्यक्त करने के हमारे अधिकार की रक्षा जरूरी है

देश में असमानता बढ़ क्यों रही है इसलिए कि कुछ लोगों को दूसरों की तुलना में अधिक पसंद किया जा रहा है...अगर भारत को वैश्विक सुपरपॉवर बनना है तो इस तरह के  भ्रष्टाचार पर सवाल करने होंगे.

खास बातें

  • भारतीय हमेशा अपनी बात कहने वाले रहे हैं, लेकिन अब इसे बुलंद करते हुए व्यवस्था को चुनौती देने का समय
     
  • मानव विकास सूचकांक के आधार पर दुनिया भर के 191 देशों में भारत 132वें स्थान पर है और हमारे ज्यादातर पड़ोसी देश हमसे बेहतर स्थिति में हैं
     
  • असहमति की आवाजों को दबाने के लिए केंद्रीय एजेंसियों के इस्तेमाल चल नहीं सकता

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