स्मार्ट मनीः पकी उम्र में हेल्थ पॉलिसी

वरिष्ठ नागरिकों के लिए हेल्थ कवरेज महंगा हो सकता है. बीमा पॉलिसी तय करने से पहले सह-भुगतान सरीखे ब्यौरों पर जरूर विचार कर लें

इलस्ट्रेशनः तन्मय चक्रवर्ती
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 04 दिसंबर 2019,
  • अपडेटेड 7:28 PM IST

अपराजिता शर्मा

इन दिनों बीमा कंपनियां वरिष्ठ नागरिकों को हेल्थ कवरेज मुहैया कर रही हैं. उनके लिए वे या तो विशेष योजनाएं लेकर आई हैं या सामान्य योजनाओं में ही उन्होंने वरिष्ठ नागरिकों के लिए विशेष खूबियां जोड़ी हैं. डायबिटीज और दिल के रोगियों के लिए भी विशिष्ट प्लान हैं. हालांकि वरिष्ठ नागरिकों के प्लान में कई चेतावनियां शामिल होती हैं, जो सामान्य स्वास्थ्य बीमे में शामिल नहीं होतीं, मसलन, ज्यादा सह-भुगतान, कठोर चिकित्सा परीक्षण, कुछ खास सुविधाओं का न होना और पहले से मौजूद बीमारियों (पीईडी) वाले लोगों के लिए ज्यादा लंबी प्रतीक्षा अवधि.

ज्यादा प्रीमियम

बीमा में सामान्य सिद्धांत है 'जितनी ज्यादा उम्र, उतना ज्यादा प्रीमियम'. स्वास्थ्य बीमा के मामले में तो यह और भी सच है, क्योंकि उम्र बढऩे के साथ मेडिकल परेशानियों की संभावना भी ज्यादा होती है. अलबत्ता वरिष्ठ नागरिकों के लिए तमाम पॉलिसियों के प्रीमियम में भारी फर्क है—रेलीगेयर हेल्थ इंश्योरेंस की केयर सीनियर पॉलिसी में सालाना प्रीमियम 24,645 रुपए है, जबकि मैक्स बूपा हेल्थ इंश्योरेंस की हेल्थ कंपैनियन पॉलिसी सालाना 46,040 रुपए का प्रीमियम वसूल करती है. यह फर्क मोटे तौर पर को-पेमेंट या सह-भुगतान में फर्क की वजह से होता है—जितना ज्यादा सह-भुगतान, उतना ही कम प्रीमियम.

सह-भुगतान से प्रीमियम कम हो सकता है

सह-भुगतान में पॉलिसी धारक को अपने इलाज का एक निश्चित प्रतिशत खर्च खुद उठाना होता है और बाकी बीमा कंपनी भुगतान करती है.

मिसाल के तौर पर स्टार हेल्थ इंश्योरेंस के सीनियर सिटिजन रेड कॉर्पेट प्लान में 30 फीसदी (पहले से मौजूद बीमारियों की स्थिति में 50 फीसदी) सह-भुगतान का अनिवार्य प्रावधान है. 10 लाख रुपए की बीमित राशि के लिए सालाना प्रीमियम 26,550 रुपए है. मान लीजिए कि 10 साल तक प्रीमियम चुकाने के बाद कोई 10 लाख रुपए के बिल का दावा करता है—तो पॉलिसी के मुताबिक 3 लाख रुपए (30 फीसदी) उसे खुद चुकाना होगा, जबकि बाकी धनराशि बीमा कंपनी चुकाएगी. असल में, उस बीमा धारक को कुल 5.65 लाख रुपए चुकाने होंगे—3 लाख रुपए सह-भुगतान के और 2.65 लाख रुपए संचयी प्रीमियम के.

इसके मुकाबले मैक्स बूपा हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी की हेल्थ कंपैनियन पॉलिसी का सालाना प्रीमियम 46,040 रुपए है, जिसमें किसी सह-भुगतान की जरूरत नहीं है. इसलिए अगर कोई 10 साल बाद 10 लाख रुपए का दावा करता है, तो उसे प्रीमियम के तौर पर कुल 4.6 लाख रुपए चुकाने होंगे (हालांकि इसमें बीमा कंपनी मेडिकल बिल की पूरी रकम चुकाती है).

तो क्या सह-भुगतान से बचना बेहतर होगा? जरूरी नहीं है. पॉलिसीबाजार डॉट कॉम के हेल्थ इंश्योरेंस के बिजनेस हेड अमित छाबड़ा कहते हैं, ''अच्छा तो यही होगा कि आप सह-भुगतान के बगैर समग्र प्लान लें, क्योंकि इनमें कोई सीमाएं नहीं होतीं. लेकिन अगर आप उम्र या पहले से मौजूद बीमारियों की वजह से इसके पात्र न हों, तो आप सह-भुगतान के विकल्प वाला प्लान चुन सकते हैं.''

बीमा से जुड़ी शर्तें और सीमाएं

चूंकि वरिष्ठ नागरिकों को मोतियाबिंद, डायबिटीज और उच्च रक्तचाप सरीखी उम्र से जुड़ी बीमारियां होने की संभावना होती है, इसलिए यह देखना जरूरी है कि पॉलिसी ऐसी बीमारियों को पूरी तरह कवर करती है या नहीं. वरिष्ठ नागरिकों के ज्यादातर प्लान बीमारियों पर आधारित सीमाओं के साथ आते हैं. मसलन, स्टार हेल्थ ऐंड एलाइड इंश्योरेंस के ज्वाइंट मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. एस. प्रकाश कहते हैं कि 5 लाख रुपए की बीमित राशि वाली पॉलिसियों पर दिल से जुड़ी बीमारियों के लिए दावे की सीमा तकरीबन 2.5 लाख रुपए के आसपास होती है. पॉलिसी खरीदने से पहले ऐसी बीमारियों को ध्यान में रखना जरूरी है.

खास बीमारियों के लिए

डायबिटीज और दिल की बीमारी वाले लोगों के लिए बीमा लेना मुश्किल हो सकता है. हालांकि बीमा कंपनियां ऐसे ग्राहकों के लिए भी पॉलिसी लाने की कोशिश कर रही हैं. रेलीगेयर हेल्थ इंश्योरेंस के एमडी और सीईओ अनुज गुलाटी कहते हैं, ''हम डायबिटीज के लिए और यहां तक कि इंसुलिन पर निर्भर मरीजों के लिए भी एक खास प्लान—केयर फ्रीडम—की पेशकश करते हैं. यही नहीं, हमारा केयर हार्ट प्लान उन लोगों के लिए सही है जिन्होंने एंजियोप्लास्टी या स्टेंट इंप्लांट सरीखे कार्डिअक ऑपरेशन करवाए हैं.''

इससे मिलते-जुलते दूसरे प्लान में स्टार हेल्थ इंश्योरेंस का डायबिटीज सेफ प्लान शामिल है जिसमें सालाना प्रीमियम 21,240 रुपए और बीमित राशि 5 लाख रुपए है. अपोलो म्यूनिख हेल्थ इंश्योरेंस का एनर्जी सिल्वर प्लान सालाना 30,291 रुपए के प्रीमियम पर समान कवरेज मुहैया करता है. यह 'नो क्लेम बोनस' यानी दावा नहीं करने पर बोनस भी देता है—हरेक क्लेम मुक्त साल के लिए बुनियादी बीमित राशि में 10 फीसदी की बढ़ोतरी, जो अधिकतम 100 फीसदी तक हो सकती है.

प्रीमियम में संशोधन

अब तक 75 की उम्र में बीमा लेना संभव नहीं था. आज ज्यादातर योजनाएं इस उम्र के लोगों को लक्ष्य कर रही हैं, मसलन, रेलीगेयर हेल्थ के केयर सीनियर, केयर फ्रीडम और केयर हार्ट प्लान और एचडीएफसी अर्गो का माय: हेल्थ सुरक्षा प्लान उम्र के बंधन के बगैर आते हैं. आइआरडीएआइ ने बीमा कंपनियों के लिए यह अनिवार्य कर दिया है कि वे पॉलिसियों को जिंदगी भर नवीनीकृत करें. हालांकि इसके साथ हरेक पांच या कुछ वर्षों में प्रीमियम में भी बदलाव किया जा सकता है. आइसीआइसीआइ लोंबार्ड जनरल इंश्योरेंस के अंडरराइटिंग, क्लेम्स, रीइंश्योरेंस और एम्चुअरी के प्रमुख संजय दत्ता कहते हैं कि कुल मिलाकर 65 और उससे ज्यादा उम्र के लोगों के लिए प्रीमियम में हर पांच साल में 25 फीसदी की औसत बढ़ोतरी हो सकती है.

अलबत्ता हमेशा ऐसा होता नहीं है. स्टार हेल्थ इंश्योरेंस के डॉ. प्रकाश कहते हैं कि कंपनी ने वरिष्ठ नागरिकों के लिए प्रीमियम पिछले 12 साल से बढ़ाया नहीं है. कुछ कंपनियां खास प्लान की पेशकश करती हैं, जिनमें प्रीमियम एक उम्र पर स्थिर हो जाता है. एचडीएफसी अर्गो जनरल इंश्योरेंस के एक्सीडेंट ऐंड हेल्थ के प्रेसिडेंट अनुराग रस्तोगी कहते हैं, ''माय: हेल्थ सुरक्षा में 71 की उम्र के बाद और माय: हेल्थ मेडिश्योर सुपर टॉप अप पॉलिसी में 61 की उम्र के बाद प्रीमियम स्थिर हो जाते हैं, जब तक कि आइआरडीएआइ तमाम उम्र और वर्गों के लिए पॉलिसी में बदलाव की इजाजत नहीं देता.''

कितनी जरूरी है जांच

वरिष्ठ नागरिकों के ज्यादातर हेल्थ प्लान में बहुत ज्यादा चिकित्सा जांच की जरूरत होती है. हालांकि कुछ कंपनियां ऐसी जांच के बगैर भी बीमे की पेशकश करती हैं. रेलीगेयर हेल्थ और स्टार इंश्योरेंस ऐसी ही दो कंपनियां हैं. स्टार के रेड कार्पेट प्लान में अगर खरीदार कुछ निश्चित मेडिकल रिपोर्ट, जैसे स्ट्रेस थीलियम रिपोर्ट ब्लड रिपोर्ट और शुगर रिपोर्ट (खून और पेशाब, खाली पेट और खाने के बाद), मुहैया करवा देता है, तो बीमा कंपनी प्रीमियम पर 10 फीसदी की छूट की पेशकश करने को भी तैयार हो सकती है.

वरिष्ठ नागरिकों की ज्यादातर योजनाएं सालाना हेल्थ चेकअप की भी पेशकश करती हैं. रेलीगेयर हेल्थ के गुलाटी कहते हैं, ''हमारे सभी प्रोडक्ट बगैर किसी अतिरिक्त खर्च के सालाना हेल्थ चेकअप की पेशकश करते हैं. इन्हें वरिष्ठ नागरिकों के जरूरतों के हिसाब से ढाला जा सकता है.'' पॉलिसियां फायदों के साथ भी आती हैं. मसलन, जरूरत पडऩे पर डॉक्टर की कंप्लीमेंटरी सुलभता, फिट रहने वालों के लिए डिस्काउंट आदि.

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